भारत-सऊदी द्विपक्षीय निवेश संधि वार्ता संपन्न, वित्त मंत्री सीतारमण ने आर्थिक व रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर दिया जोर

भारत-सऊदी द्विपक्षीय निवेश संधि वार्ता संपन्न, वित्त मंत्री सीतारमण ने आर्थिक व रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर दिया जोर

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एआईआईबी 2026 की वार्षिक बैठक के इतर सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और नेपाल के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कीं। इस दौरान उन्होंने सऊदी अरब को भारत का बेहद भरोसेमंद और प्रमुख रणनीतिक साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर बातचीत के सफल समापन का स्वागत किया।

सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जादान के साथ हुई वार्ता में रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर चर्चा हुई। अल-जादान ने भारत की मजबूत आर्थिक प्रगति और बेहतर होते निवेश परिवेश की सराहना की तथा अपनी अर्थव्यवस्था से जुड़ी प्राथमिकताओं को साझा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्ववर्ती सऊदी यात्रा के विजन को आगे बढ़ाते हुए दोनों पक्षों ने आपसी पूंजी प्रवाह को गति देने पर बात की, जिसमें सऊदी अरब ने भारतीय निवेश आकर्षित करने में भी विशेष रुचि दिखाई। वित्त मंत्रालय के अनुसार, बीआईटी समझौता दोनों देशों के निवेशकों के लिए एक पारदर्शी और सुरक्षित ढांचा सुनिश्चित करेगा, जिसे सऊदी पक्ष जल्द से जल्द प्रभावी देखना चाहता है।

स्विट्जरलैंड के एआईआईबी गवर्नर राजदूत पिएत्रो लाजेरी से मुलाकात के दौरान वित्त मंत्री ने नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) को विदेशी पूंजी के लिए एक मुफीद मंच बताते हुए स्विस निवेशकों को भारतीय बुनियादी ढांचा क्षेत्र में भागीदारी के लिए प्रेरित किया। लाजेरी ने रेखांकित किया कि भारत में स्विस प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की दर वैश्विक औसत से कहीं अधिक तेज है। उन्होंने आगामी नई दिल्ली दौरे, दूसरे ईएफटीए प्रॉस्पेरिटी समिट और द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते को अंतिम रूप देने पर बल दिया। सीतारमण ने गिफ्ट आईएफएससी में उपलब्ध कर रियायतों और सुगम व्यावसायिक परिवेश का लाभ उठाने का आह्वान भी स्विस वित्तीय संस्थानों से किया।

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले के साथ बैठक में दोनों देशों ने नई दिल्ली में हुई पिछली वार्ता के निर्णयों की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान नेपाल में हालिया बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण और राहत कार्यों की प्राथमिकताओं पर विस्तार से विमर्श हुआ, जिसके तहत भारत की ओर से मिलने वाले सहयोग को सुचारु रखने के लिए संयुक्त टीमों के सतत संपर्क पर सहमति बनी। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने पूर्व निर्धारित परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के साथ-साथ वित्तीय लेन-देन को सुगम बनाने वाले यूपीआई-एनपीआई (UPI-NPI) लिंक को शीघ्र धरातल पर उतारने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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