नई दिल्ली में बुधवार को देश के पहले चार दिवसीय ‘वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी’ (डब्ल्यूसीओजी 2026) का विधिवत उद्घाटन करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने भारत के बदलते स्वास्थ्य परिदृश्य का ब्योरा प्रस्तुत किया। 30 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलने वाले इस सम्मेलन में दुनिया भर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट, सर्जन और पैरामेडिकल विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। ‘ट्रांसफॉर्मिंग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल हेल्थ, प्रिजर्विंग नेचर’ विषय पर केंद्रित इस आयोजन की मेजबानी इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी तथा वर्ल्ड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ऑर्गनाइजेशन द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है, जिसमें लिवर, पैंक्रियाज और आंत से जुड़े प्रमुख भारतीय चिकित्सा संघ सहयोगी हैं।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के मार्गदर्शन में देश की स्वास्थ्य प्रणाली को इलाज के साथ-साथ बीमारियों की रोकथाम और स्वास्थ्य संवर्धन के अनुकूल बनाया गया है। उन्होंने बताया कि 1.86 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का व्यापक नेटवर्क ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में प्राथमिक उपचार सुनिश्चित कर रहा है। इन केंद्रों पर 30 वर्ष से ऊपर के नागरिकों की गैर-संचारी रोगों के लिए स्क्रीनिंग की जा रही है, जिसके तहत रक्तचाप और मधुमेह के 42-42 करोड़, ओरल कैंसर के 36 करोड़, ब्रेस्ट कैंसर के 17 करोड़ और सर्वाइकल कैंसर के 9 करोड़ से अधिक परीक्षण संपन्न हो चुके हैं। पोषण माह, ईट राइट इंडिया और तेल की खपत घटाने के प्रयासों से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर नियंत्रण का प्रयास किया जा रहा है।
मातृ एवं शिशु कल्याण के संकेतकों पर प्रकाश डालते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अस्पताल में सुरक्षित प्रसव की दर 2015-16 के 79 फीसदी से सुधरकर करीब 90 फीसदी हो चुकी है। ऐतिहासिक तुलना करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि 1990 से 2023 की अवधि में भारत ने मातृ मृत्यु में 86 प्रतिशत, बाल मृत्यु (5 वर्ष से कम) में 79 प्रतिशत तथा नवजात मृत्यु में 70 प्रतिशत की भारी गिरावट हासिल की है। यह आंकड़े देश में आधारभूत स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और टीकाकरण के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाते हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा का उल्लेख करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि सितंबर 2018 में लागू आयुष्मान भारत योजना 60 करोड़ से अधिक लोगों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध करा रही है। योजना का दायरा बढ़ाकर 70 वर्ष से ऊपर के लगभग 6 करोड़ बुजुर्गों को भी बिना किसी आय सीमा के इसमें शामिल किया गया है। अब तक 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक लागत के 13 करोड़ से ज्यादा उपचार किए जा चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ, 20,149 जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति ने नागरिकों के करीब 45,000 करोड़ रुपये बचाए हैं। इन्हीं नीतियों का परिणाम है कि कुल चिकित्सा व्यय में जनता के व्यक्तिगत खर्च की हिस्सेदारी 2014-15 के 62 प्रतिशत से घटकर 2021-22 में 43.4 प्रतिशत पर आ गई है।
समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री ने गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वरिष्ठ चिकित्सकों को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने रेखांकित किया कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच युवा चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को नई तकनीकों, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और शोध निष्कर्षों से रूबरू कराकर भविष्य के चिकित्सा नवाचारों को गति देगा। इस उद्घाटन सत्र में केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, एम्स निदेशक प्रो. निखिल टंडन, डब्ल्यूजीओ अध्यक्ष डॉ. कैरोलिना ओलानो, आयोजन प्रमुख डॉ. गोविंद मखारिया तथा आईएसजी के महासचिव डॉ. मैथ्यू फिलिप सहित कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय हस्तियां उपस्थित रहीं।