राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: भारत ने तीन वर्ष में हासिल किया 1,000 किमी क्वांटम-सुरक्षित संचार का लक्ष्य, डॉ. जितेंद्र सिंह ने की प्रगति की समीक्षा

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: भारत ने तीन वर्ष में हासिल किया 1,000 किमी क्वांटम-सुरक्षित संचार का लक्ष्य, डॉ. जितेंद्र सिंह ने की प्रगति की समीक्षा

नई दिल्ली में आयोजित ‘प्रगति क्यू-फाउंड्री 2026’ बैठक के दौरान केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश के क्वांटम परिदृश्य की अहम उपलब्धियां साझा कीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की अनुकूल नीतियों के चलते भारत का क्वांटम तंत्र तेजी से सशक्त हो रहा है, जिससे उन्नत तकनीकों में निजी क्षेत्र और उद्योगों की भागीदारी के नए रास्ते खुले हैं। भारत अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा, तकनीकी दक्षता और औद्योगिक तत्परता के बल पर वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन की रफ्तार को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मिशन के अंतर्गत आठ वर्षों में 2,000 किलोमीटर क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था। देश ने निर्धारित समय से काफी पहले, महज तीन वर्षों में ही 1,000 किलोमीटर का अहम पड़ाव पार कर लिया है। उन्होंने इसे देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रमाण बताते हुए कहा कि भारत अब केवल विदेशी तकनीकों का उपभोक्ता बनकर नहीं रहेगा, बल्कि स्वदेशी स्तर पर शोध, बुनियादी ढांचे और उच्च स्तरीय क्षमताओं का विकास कर रहा है।

इस राष्ट्रीय प्रयास को चार प्रमुख संस्थानों—आईआईएससी बेंगलुरु, आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी दिल्ली—में स्थापित विषयगत केंद्रों के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है। इन केंद्रों में 17 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 43 संस्थानों से जुड़े 152 शोधकर्ता कार्यरत हैं। यह शोध दल क्वांटम कंप्यूटिंग, सुरक्षित संचार, सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी तथा सामग्री और उपकरणों के निर्माण जैसे जटिल क्षेत्रों में समाधान विकसित कर रहे हैं।

सम्मेलन के दौरान डॉ. सिंह ने 10 नई स्वदेशी तकनीकों और 9 नए स्टार्टअप्स का औपचारिक शुभारंभ किया, जिससे समर्थित स्टार्टअप्स की कुल संख्या 17 से बढ़कर 26 हो गई है। एक बड़ी तकनीकी सफलता के तहत, आईआईटी मद्रास की टीम ने बीएसएनएल के मौजूदा फाइबर नेटवर्क और 17 सुरक्षित नोड्स के जरिए चेन्नई से बेंगलुरु के बीच हाइब्रिड पीक्यूसी-क्यूकेडी लिंक का सफल संचालन कर दिखाया। साथ ही, शोधकर्ताओं के उपयोग के लिए 50 पिकोसेकंड की टाइमिंग सिंक्रोनाइजेशन तकनीक को ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म पर जारी किया गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने रेखांकित किया कि सरकार स्टार्टअप्स को केवल वित्तीय मदद तक सीमित न रखकर बुनियादी ढांचा, मार्गदर्शन, तकनीक का सत्यापन और बाजार तक सीधी पहुंच उपलब्ध करा रही है। नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि यह मिशन उद्योग और शिक्षा जगत को जोड़कर आत्मनिर्भरता का आधार बना रहा है। वहीं, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने जानकारी दी कि चारों केंद्रों से करीब 52 प्रौद्योगिकियां विकसित हुई हैं, जो तकनीक विकास के पारंपरिक समय चक्र को तेजी से घटा रही हैं।

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