भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को आंकड़े जारी करते हुए बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में इस वर्ष पिछले सवा सौ वर्षों का सबसे कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून दर्ज किया गया है। जून से सितंबर तक की अवधि में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मात्र 1,017.1 मिमी वर्षा हुई, जो वर्ष 1901 में आधिकारिक रिकॉर्डिंग शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे निचला स्तर है। आमतौर पर भारी वर्षा के लिए पहचाने जाने वाले इस भूभाग के मौसमी मिजाज में यह एक अप्रत्याशित और गंभीर गिरावट है।
विभाग के अनुसार, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के मौसम संबंधी उप-मंडलों में पूरे मानसून सत्र के दौरान लगातार वर्षा की भारी कमी देखी गई। जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर—इन चारों महीनों में इन राज्यों में सामान्य से काफी कम बादल बरसे। पारंपरिक रूप से प्रचुर वर्षा वाले इस अंचल में लंबे समय तक सूखे जैसे हालात चिंता का विषय हैं, क्योंकि यहां की कृषि व्यवस्था, जल स्रोत और स्थानीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह दक्षिण-पश्चिम मानसूनी फुहारों पर टिकी होती है।
यदि संपूर्ण देश के आंकड़ों पर नजर डालें, तो राष्ट्रीय स्तर पर भी चार महीने का यह मानसूनी चक्र सामान्य से नीचे ही समाप्त हुआ। देश भर में इस दौरान कुल 759.4 मिमी औसत बारिश हुई। इन आंकड़ों के साथ वर्ष 2026 का मानसून सत्र 1901 के बाद से 13वां और 2001 के बाद से चौथा सबसे कम वर्षा वाला सीजन आंका गया है। हालांकि, देश के बाकी हिस्सों की तुलना में पूर्वोत्तर में स्थिति कहीं अधिक विषम और चिंताजनक रही। सितंबर के अंत में असम के कुछ इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश भी इस बड़े मौसमी घाटे की भरपाई नहीं कर सकी।
मौसम कार्यालय की समीक्षा बताती है कि अंतिम दौर की तेज बारिश सीजन भर के सूखे को पाटने में नाकाम रही। कम बारिश के साथ-साथ इस समूचे क्षेत्र को असामान्य गर्मी की मार भी झेलनी पड़ी। सितंबर माह में पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्से का औसत तापमान 27.95 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जो सामान्य से 0.74 डिग्री अधिक है। वर्ष 1901 से अब तक के इतिहास में यह सितंबर का छठा सबसे गर्म महीना दर्ज किया गया।
आने वाले समय के लिए आईएमडी ने मिला-जुला पूर्वानुमान जताया है। अक्टूबर महीने में देश के अधिकांश भागों में बारिश सामान्य से नीचे रहने की संभावना है, यद्यपि पूर्वी भारत के चुनिंदा हिस्सों में सामान्य से अधिक पानी गिर सकता है। तापमान की बात करें तो पूर्वोत्तर में दिन का पारा सामान्य के आसपास बना रहेगा, जबकि रात के न्यूनतम तापमान में सामान्य से अधिक गिरावट आ सकती है, जो मानसून की विदाई के साथ बदलते मौसमी रुख का संकेत है।