केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को नई दिल्ली में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय वार्ता में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को सशक्त करने तथा आपसी निवेश के अवसरों को गति देने पर व्यापक चर्चा हुई।
वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के जरिए इस बैठक की पुष्टि करते हुए साझा किया कि दोनों पक्षों ने पारस्परिक हितों के प्रमुख मुद्दों की समीक्षा की। बातचीत का मुख्य केंद्र प्रस्तावित द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) की प्रगति रहा। दोनों देशों ने यह विश्वास व्यक्त किया कि बीआईटी पर सहमति बनने से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाह में तेजी आएगी और समग्र आर्थिक संबंधों को नया संबल मिलेगा।
इस बैठक से पूर्व, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी स्विस राष्ट्रपति पार्मेलिन के साथ एक पृथक बैठक की। इस संवाद में दोनों देशों ने विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में चल रहे ऐतिहासिक सहयोग को एक दीर्घकालिक और अधिक संगठित स्वरूप प्रदान करने का संकल्प लिया। दोनों पक्षों ने माना कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा और शोध आधारित रणनीतिक सहयोग अनिवार्य है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बैठक में भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि देश अब विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अंतरविषयक व मिशन-मोड कार्यप्रणाली पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को किसी एकल क्षेत्र तक सीमित न रखकर इसे संपूर्ण तकनीकी परिदृश्य में व्यापक बदलाव लाने वाले माध्यम के रूप में अपना रहा है। इसके साथ ही उन्होंने क्वांटम तकनीक, जीनोम सीक्वेंसिंग, वैक्सीन निर्माण, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और गहरे समुद्र से जुड़े अनुसंधानों में भारत की हालिया उपलब्धियों की जानकारी दी।
संवाद के दौरान ब्लू इकोनॉमी और बायो-इकोनॉमी जैसे नए क्षेत्रों में संयुक्त साझेदारी की संभावनाओं पर भी सहमति बनी। डॉ. सिंह ने इंडो-स्विस रिसर्च फ्रेमवर्क और संयुक्त वैज्ञानिक बोर्ड की प्रगति की सराहना करते हुए इसे वैज्ञानिक साझेदारी की मजबूत नींव बताया।
वहीं, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन ने भारत को वैश्विक स्तर पर अनुसंधान एवं विकास (R&D) के एक सशक्त केंद्र के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्विट्जरलैंड नवाचार और उच्च शिक्षा में भारत के साथ स्थायी साझेदारी का आकांक्षी है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने अतिरिक्त 45 मिलियन स्विस फ्रैंक (सीएचएफ) के आवंटन की घोषणा की और अपेक्षा जताई कि भारत की ओर से भी समान वित्तीय सहभागिता मिलने से संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं नई ऊंचाइयों को छू सकेंगी।