भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को तेज बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक नुकसान के साथ लाल निशान में बंद हुए। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान उतार-चढ़ाव के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 429.11 अंक (0.59 प्रतिशत) टूटकर 72,638.70 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,603.05 पर बंद हुआ।
बाजार में आई इस कमजोरी के पीछे प्रमुख कारण मेटल और रियल्टी सेक्टरों पर बना दबाव रहा। सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी मेटल 2.33 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 1.77 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ बंद हुए। इसके अलावा ऑटोमोबाइल (-1.58 प्रतिशत), कमोडिटीज (-1.43 प्रतिशत), इंडिया डिफेंस (-1.41 प्रतिशत), आईटी (-1.34 प्रतिशत) और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े निफ्टी पीएसई (-1.22 प्रतिशत) में भी बिकवाली दर्ज की गई।
चौतरफा मंदी के इस माहौल में केवल बैंकिंग और मीडिया क्षेत्रों ने बाजार को संभालने का प्रयास किया। विश्लेषकों के अनुसार, ऊंची ब्याज दरों के माहौल में बेहतर मार्जिन की उम्मीद के चलते बैंकिंग शेयरों ने बाजार के रुख के विपरीत मजबूती दिखाई। इसी के चलते निफ्टी पीएसयू बैंक 1 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.08 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 0.69 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद होने में सफल रहे।
लार्जकैप शेयरों की तुलना में मझोले और छोटे शेयरों में मिलाजुला रुझान देखने को मिला। जहां निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 378.60 अंक या 0.63 प्रतिशत फिसलकर 59,382.60 के स्तर पर बंद हुआ, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने विपरीत दिशा पकड़ी और 58.25 अंक यानी 0.30 प्रतिशत की मजबूती लेकर 19,506.95 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से केवल कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस ही बढ़त दर्ज कर पाए। दूसरी ओर टाइटन, बीईएल, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एलएंडटी, टाटा स्टील, एमएंडएम, एचसीएल टेक, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, इंडिगो, एचयूएल, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट और टेक महिंद्रा के शेयरों में नुकसान दर्ज किया गया।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों ने भी बाजार पर दोहरा दबाव बनाया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अपेक्षा के अनुसार ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद बाजार की तीव्र प्रतिक्रिया नीतिगत रुख में हुए बदलाव पर रही; केंद्रीय बैंक ने अपना रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया, जिसे दर चक्र में सख्ती का स्पष्ट संकेत माना गया। साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व (FOMC) की बैठक से पहले अमेरिकी यील्ड में तेजी, मजबूत डॉलर और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निरंतर बिकवाली के चलते रुपये पर दबाव बना रहा, जिसने सूचकांकों की गिरावट को और गहरा कर दिया।