भारत-आइसलैंड के बीच स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु सहयोग पर सहमति, केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने किया दौरा

भारत-आइसलैंड के बीच स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु सहयोग पर सहमति, केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने किया दौरा

केंद्रीय विदेश तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने शुक्रवार को आइसलैंड की राजधानी रेक्जाविक में वहां के पर्यावरण, ऊर्जा और जलवायु मंत्री जोहान पाल जोहानसन से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच स्वच्छ ऊर्जा, नवीकरणीय स्रोतों, जलवायु संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में आपसी सहयोग को सुदृढ़ करने के अवसरों पर विस्तार से विमर्श किया गया।

मुलाकात के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि जोहान पाल जोहानसन हाल ही में भारत में आयोजित दूसरे भारत-ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन में शिरकत कर लौटे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा संक्रमण जैसे अहम विषयों पर व्यावहारिक साझीदारी को नई गति देने की दिशा में यह संवाद अत्यंत सार्थक रहा।

दौरे के क्रम में कीर्ति वर्धन सिंह ने विश्व विख्यात ‘हेल्लिशेइडी पावर प्लांट’ का भी निरीक्षण किया, जिसे भूतापीय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी संयंत्रों में गिना जाता है। इस संयंत्र के कामकाज को देखने के बाद उन्होंने कहा कि स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के उत्पादन के लिए भूतापीय संसाधनों का अभिनव प्रयोग आइसलैंड की तकनीकी कुशलता को दर्शाता है। यह अनुभव भारत और आइसलैंड के बीच ऊर्जा रूपांतरण और तकनीकी सहयोग को गहरा करने के लिहाज से काफी उपयोगी सिद्ध होगा।

पर्यावरण संरक्षण के वैश्विक संदेश को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री ने हाफनारफजोर्डर स्थित ह्वालेयरारवाटन झील के किनारे ‘इंग्लिश ओक’ का एक पौधा रोपा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत किए गए इस पौधारोपण पर उन्होंने कहा कि यह प्रतीकात्मक कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को सुरक्षित रखने और एक हरित, टिकाऊ भविष्य की दिशा में हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराता है।

इससे पहले, रेक्जाविक में आयोजित आर्कटिक सर्कल असेंबली के दौरान भारत द्वारा आयोजित विशेष सत्र “आर्कटिक और जलवायु परिवर्तन: पर्यवेक्षक देशों के दृष्टिकोण” में उन्होंने उद्घाटन वक्तव्य दिया था। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्कटिक के प्रति भारत का दृष्टिकोण मुख्य रूप से वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित है, जिसका उद्देश्य शोध का विस्तार करना, सतत विकास को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर आपसी सहयोग को मजबूत करना है।

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