मध्य अमेरिकी देश पनामा में शुक्रवार और शनिवार के दौरान 7.7 तथा 6.6 तीव्रता के दो बड़े भूकंप दर्ज किए गए, जिसके कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया और व्यापक क्षति पहुंची। इसी अवधि में शनिवार की सुबह तिब्बत में भी 3.7 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र भूमि से दस किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) और सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, पहला तेज झटका शुक्रवार को पनामा के दक्षिणी छोर के समीप दर्ज हुआ। रिक्टर पैमाने पर 7.7 की तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था। इसके प्रभाव से राजधानी पनामा सिटी में सौ मील से भी अधिक दूरी पर स्थित इमारतें बुरी तरह हिल गईं, जिसके बाद प्रशासन को लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा। इसके उपरांत दिनभर कई झटके आते रहे और फिर 6.6 तीव्रता का एक और जोरदार भूकंप आया, जिसका केंद्र भी 10 किलोमीटर की गहराई पर था।
इन दोहरे झटकों का सर्वाधिक प्रभाव देश के मध्य हिस्से में देखा गया, जहां कई इमारतें ढह गईं और मुख्य मार्गों को भारी नुकसान पहुंचा। राजधानी पनामा सिटी तक मकानों की दीवारों में गहरी दरारें आ गईं। भयभीत नागरिक रातभर अपने आवासों से निकलकर खुले मैदानों में डटे रहे और भोर होने तक स्थिति सामान्य होने का इंतजार करते रहे।
पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि शुक्रवार शाम तक किसी भी व्यक्ति के हताहत अथवा घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है, यद्यपि आगामी घंटों में परिस्थितियां बदल सकती हैं। आपदा की अप्रत्याशित प्रकृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के संकट के लिए कोई भी पहले से तैयार नहीं रहता और न ही ऐसी विभीषिका के लिए पूरी तरह तैयारी संभव है।
घटना के प्रारंभिक दौर में यूएस पैसिफिक सुनामी वार्निंग सेंटर ने पनामा के तटीय क्षेत्रों में सुनामी की लहरें उठने की चेतावनी जारी की थी। हालांकि, बाद के आकलन में स्थिति को सामान्य घोषित करते हुए इस चेतावनी को वापस ले लिया गया। वहीं, तिब्बत में आए 3.7 तीव्रता के झटके की गहराई भी 10 किलोमीटर ही मापी गई।