फर्जी डिग्री और अनियंत्रित निजी कृषि संस्थानों पर रोक की तैयारी, केंद्र जल्द लाएगा एग्रीकल्चर काउंसिल

फर्जी डिग्री और अनियंत्रित निजी कृषि संस्थानों पर रोक की तैयारी, केंद्र जल्द लाएगा एग्रीकल्चर काउंसिल

नई दिल्ली के पूसा परिसर में बुधवार को आयोजित एग्रीविज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन में केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण और संस्थागत सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि देश को दुनिया की ‘फूड बास्केट’ बनाने के साथ-साथ कृषि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में फर्जी डिग्रियों के कारोबार और नियमों की अनदेखी कर चल रहे निजी कृषि महाविद्यालयों पर नकेल कसने के लिए शीघ्र एग्रीकल्चर काउंसिल का गठन किया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने कृषि छात्रों को आश्वस्त किया कि उनकी डिग्रियों को व्यर्थ नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक लाभ के लिए डिग्रियां बेचने वाले शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर पूरी तरह रोक लगेगी। छात्रों की बीएससी और एमएससी (एजी) डिग्रियों को उद्योग और रोजगार के अनुरूप उपयोगी बनाए रखने के लिए सरकार अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के रोडमैप पर काम कर रही है।

कृषि क्षेत्र की ऐतिहासिक प्रगति को साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने विदेशी अनाज की निर्भरता (पीएल-480) से निकलकर पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल की है। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि 2014 से 2024 के दौरान देश का कृषि उत्पादन 49 फीसदी बढ़ा है। आज भारत चावल उत्पादन और निर्यात में वैश्विक स्तर पर प्रथम तथा गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब प्राथमिकता उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वैज्ञानिक भंडारण, आधुनिक प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति तंत्र को मजबूत करने की है।

अधिवेशन में मौजूद शोधार्थियों और विषय विशेषज्ञों से संवाद करते हुए उन्होंने आग्रह किया कि वे गहन वैचारिक मंथन से जो भी समाधान और नीतियां तैयार करेंगे, सरकार उन्हें राष्ट्रहित में पूरी निष्ठा से धरातल पर उतारेगी। इन सुझावों को अंतिम रूप देने के लिए अगले 15 से 30 दिनों के भीतर हितधारकों के साथ एक और उच्चस्तरीय बैठक की जाएगी, जिसमें प्राथमिक और भविष्योन्मुखी कदमों का निर्धारण होगा।

सीमांत किसानों के सशक्तिकरण पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि देश में औसत जोत का आकार 0.96 हेक्टेयर ही है, जिससे केवल पारंपरिक खेती से गुजारा संभव नहीं है। इसलिए किसानों को अनाज के साथ फल, सब्जियां, औषधीय उपज, पशुपालन, मछली पालन, मौन पालन और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही खेती में दक्षता बढ़ाने के लिए रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग और एआई जैसी आधुनिक तकनीकों के समावेशन को प्राथमिकता दी जा रही है।

समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री ने एग्रीविज़न की 10 वर्षीय उपलब्धियों पर केंद्रित स्मारिका पुस्तिका जारी की। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में कृषि जगत से जुड़े प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुए।

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