तिब्बत क्षेत्र में गुरुवार रात करीब 8:03 बजे रिक्टर पैमाने पर 7.0 तीव्रता का जबरदस्त भूकंप दर्ज किया गया। यह प्राकृतिक आपदा ऐसे समय में सामने आई है, जब यह इलाका पिछले महीने आई भीषण आकस्मिक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के गंभीर संकट से पूरी तरह संभल भी नहीं पाया था।
भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस ताजा भूकंप का केंद्र पृथ्वी की सतह से लगभग 173 किलोमीटर नीचे केंद्रित था। भौगोलिक दृष्टि से यह स्थल तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बताया गया है। इससे पूर्व, 3 सितंबर को भी इस भूभाग में 5.0 तीव्रता का झटका महसूस किया गया था, जिसका केंद्र सतह से लगभग 14 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।
भूगर्भीय इतिहास पर नजर डालें तो चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर के रिकॉर्ड बताते हैं कि जनवरी 2025 में भी इस इलाके ने 6.8 तीव्रता के एक विनाशकारी भूकंप का सामना किया था। उस हादसे में 120 से अधिक नागरिकों की जान चली गई थी, जबकि सैकड़ों लोग जख्मी हुए थे। पर्यावरण एवं भूविज्ञान के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि वैश्विक स्तर पर चढ़ता तापमान, तेजी से घटते ग्लेशियर और लगातार विकराल होते मौसमी बदलाव चिंगहाई-तिब्बत पठारी क्षेत्र में प्राकृतिक विपदाओं की आशंका को कहीं अधिक गहरा रहे हैं।
विशेषज्ञों का आकलन है कि इस नए भूकंपीय झटके ने पूरे पठार की नाजुक भौगोलिक संरचना को फिर से सतह पर ला खड़ा किया है, जहां आबादी पहले से ही पिछली आपदाओं के गहरे जख्म झेल रही है। दरअसल, यह भूगर्भीय हलचल 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमावर्ती इलाके में घटी उस भयावह त्रासदी के कुछ ही हफ्तों बाद दर्ज की गई है, जब विशाल हिमस्खलन और चट्टानें खिसकने से प्रलयंकारी सैलाब उमड़ पड़ा था।
अगस्त माह के उस जलप्रलय ने बड़े पैमाने पर रिहायशी मकानों, सड़कों और प्रमुख पुलों को बहा दिया था, साथ ही पनबिजली बुनियादी ढांचे को भारी आघात पहुंचाया था। आपदा राहत अभियान समाप्त होने तक नेपाल की ओर कम से कम 1,455 शव बरामद किए गए थे और 5,285 नागरिक लापता सूचीबद्ध थे। नेपाली प्रशासन ने तात्कालिक राहत और पुनर्निर्माण के शुरुआती चरण के लिए लगभग 5 अरब डॉलर के भारी बजट की आवश्यकता जताई है।
दूसरी तरफ, तिब्बत सीमा में हुए नुकसान को लेकर चीनी सरकारी प्रसारक ने 43 लोगों के हताहत होने और 500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की पुष्टि की थी। पूर्व के आधिकारिक बयानों में लापता व्यक्तियों का आंकड़ा 558 दर्ज था, जिसमें 260 विदेशी नागरिक शामिल थे। हालांकि, दुर्गम सीमांत क्षेत्रों से सूचनाओं के सीमित प्रवाह के चलते इस समूची तबाही के जमीनी स्तर का निष्पक्ष और स्वतंत्र मूल्यांकन करना अब भी एक जटिल चुनौती बना हुआ है।