सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन, यानी शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में लगातार चौथे सत्र में गिरावट दर्ज की गई और दोनों प्रमुख सूचकांक नुकसान के साथ बंद हुए। सत्र समाप्ति पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17 प्रतिशत टूटकर 73,123.83 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 87.65 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 22,600.00 अंक पर आ गया।
सत्र के दौरान बिकवाली की रफ्तार व्यापक स्तर पर काफी आक्रामक रही। इसका सीधा असर मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों पर दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1,263.30 अंक यानी 2.21 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई और यह 55,800.65 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी 536.45 अंक यानी 2.94 प्रतिशत लुढ़ककर 17,739.45 के स्तर पर आ गया।
क्षेत्रवार आधार पर देखें तो बाजार के अधिकांश सेक्टर्स नुकसान के साथ लाल निशान में बंद हुए। प्रमुख गिरावट वाले क्षेत्रों में निफ्टी मेटल 2.71 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 2.63 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.60 प्रतिशत शामिल रहे। इनके अतिरिक्त निफ्टी रियल्टी 2.38 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 2.26 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 1.66 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 1.64 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 1.57 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 1.41 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 1.33 प्रतिशत तथा निफ्टी फार्मा 1.04 प्रतिशत की कमजोरी पर बंद हुआ।
सेंसेक्स घटकों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। खरीदारी के सहारे हरे निशान में बंद होने वाले शेयरों में इटरनल, एलएंडटी, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, एक्सिस बैंक, इन्फोसिस और आईसीआईसीआई बैंक रहे। इसके विपरीत टाटा स्टील, ट्रेंट, टेक महिंद्रा, बीईएल, इंटरग्लोब एविएशन, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एनटीपीसी, एसबीआई, एचयूएल, सन फार्मा, भारती एयरटेल, आईटीसी और एमएंडएम में तेज बिकवाली देखी गई।
विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी की तुलना में मिडकैप व स्मॉलकैप इंडेक्स में आई तेज फिसलन निवेशकों के लिए सतर्कता का कारण बनी हुई है। बाजार पर यह दबाव मुख्य रूप से खिंचे हुए वैल्यूएशन, लीवरेज्ड पोजीशन के सौदे काटे जाने, कच्चे तेल में तेजी और सुस्त वैश्विक संकेतों के चलते उत्पन्न हुआ है। इसके अतिरिक्त वोलैटिलिटी इंडेक्स (इंडिया वीआईएक्स) में उछाल यह संकेत दे रहा है कि बाजार में अस्थिरता का यह दौर आगे भी जारी रह सकता है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें उच्च स्तर पर टिके रहने की आशंका है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी बिकवाली का असर निवेशकों के रुझान पर पड़ रहा है। भविष्य की दिशा को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसले और महंगाई व आर्थिक वृद्धि के बीच का तालमेल आगे का रास्ता तय करेंगे। इस अनिश्चितता के बीच केवल स्पष्ट कमाई दृष्टिकोण और आकर्षक वैल्यूएशन वाले चुनिंदा शेयर ही बाजार में मजबूती दिखा पाएंगे।