नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि भारत और चीन के आपसी संबंधों की समग्र प्रगति के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में अमन और स्थिरता कायम रहना बेहद आवश्यक है।
प्रवक्ता के अनुसार, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति तब तनावपूर्ण होती है जब चीनी पक्ष तयशुदा गश्त व्यवस्थाओं का उल्लंघन करता है। जायसवाल ने बताया कि दोनों देश एलएसी के बकाया मसलों को हल करने तथा किसी भी तरह के भ्रम या गलत आकलन की गुंजाइश खत्म करने के लिए स्थापित सैन्य और कूटनीतिक चैनलों के जरिए निरंतर बातचीत कर रहे हैं। इसके साथ ही, सीमा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के मकसद से उपयुक्त इलाकों में एलएसी की समझ को स्पष्ट करने के तौर-तरीकों पर विमर्श करने पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी है।
ब्रीफिंग के दौरान रणधीर जायसवाल ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अजरबैजान दौरे का ब्योरा भी साझा किया। उन्होंने जानकारी दी कि शुक्रवार को बाकू में विदेश मंत्री ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से भेंट कर द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न आयामों को विस्तार देने पर गहन मंथन किया।
इस मुलाकात के दौरान विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति अलीयेव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की राष्ट्रपति की शुभकामनाएं संप्रेषित कीं। इसके उपरांत, डॉ. जयशंकर ने अपने अजरबैजानी समकक्ष के साथ भी विस्तृत और सार्थक चर्चा की। दोनों पक्षों ने राजनीतिक स्तर पर विमर्श को सघन बनाने और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों सहित विभिन्न क्षेत्रों में आपसी दौरों को गति देने पर रजामंदी व्यक्त की। यह यात्रा बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव के बीच हुई पूर्व बैठक की निरंतरता का हिस्सा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, वार्ता में सुरक्षा चुनौतियां, आतंकवाद और दोनों देशों के साझा जोखिमों से जुड़े मुद्दों पर भी बात हुई। दोनों राष्ट्र इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अपने नागरिकों की सुरक्षा, शांति और खुशहाली को बढ़ाने के लिए आपसी तालमेल को सुदृढ़ करना और साझा समस्याओं के समाधान हेतु एकजुट प्रयास करना अनिवार्य है।