नई दिल्ली में रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और रूस की संसद ‘स्टेट ड्यूमा’ के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन के बीच एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। इस वार्ता का मुख्य केंद्र दोनों देशों के विधायी सदनों के बीच संस्थागत संबंधों को और प्रगाढ़ करना तथा आपसी संसदीय आदान-प्रदान को बढ़ावा देना रहा।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के नियमित दौरों के साथ-साथ विशेष रूप से महिला और युवा सांसदों के बीच संवाद स्थापित करने पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने आपसी विश्वास और साझा प्राथमिकताओं पर टिकी ‘विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह संवाद 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच 2026 की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले आयोजित हुआ। इस अवसर पर भाजपा सांसद संबित पात्रा, विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
वार्ता के मुख्य बिंदुओं को साझा करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक मित्रता और समझ दीर्घकालिक रिश्तों की रीढ़ हैं। चूंकि भारत और रूस अपने राजनयिक संबंधों के 80 वर्ष पूरे करने जा रहे हैं, इसलिए यह साझेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। बिरला ने रेखांकित किया कि दोनों देशों का संसदीय सहयोग वैश्विक पटल पर आपसी हितों को मजबूती प्रदान करेगा।
संसदीय कार्यप्रणाली में आधुनिक तकनीक की भूमिका का उल्लेख करते हुए बिरला ने रूसी समकक्ष को भारत के नवाचारों से अवगत कराया। उन्होंने ‘संसद भाषिणी’ जैसी पहलों का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि किस प्रकार तकनीक के जरिए विधायी कार्यों को आम नागरिकों के लिए अधिक पारदर्शी, सुगम और समावेशी बनाया जा रहा है।
वैश्विक विषयों पर चर्चा के क्रम में दोनों पक्षों ने आतंकवाद से निपटने के लिए एकजुट अंतरराष्ट्रीय प्रयासों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया। लोकसभा अध्यक्ष ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी दावेदारी का रूस द्वारा लगातार समर्थन किए जाने पर आभार व्यक्त किया। इससे पूर्व, भारत पहुंचे वोलोदिन ने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की।
रूसी प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा 26 और 27 अक्टूबर को संसद के ‘संविधान सदन’ के सेंट्रल हॉल में आयोजित हो रहे 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम के सिलसिले में हुआ है। इससे पूर्व गुरुवार को एक पत्रकार वार्ता में बिरला ने बताया था कि भारत की अध्यक्षता में हो रहा यह मंच संसदीय कूटनीति के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाग लेकर विदेशी प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे, जबकि 25 अक्टूबर को संयुक्त घोषणापत्र को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिनिधिमंडलों के सचिवों की बैठक निर्धारित की गई।