भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में लिकटेंस्टाइन के वंशानुगत राजकुमार एलोइस तथा राजकुमारी सोफी की अगवानी की और उनके सम्मान में आधिकारिक भोज आयोजित किया। इस उच्चस्तरीय भेंट के दौरान दोनों देशों ने वाणिज्य, पूंजी निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन-जन के आपसी संपर्कों को अधिक सशक्त बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
लिकटेंस्टाइन के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि भारत के साथ उनका निरंतर संवाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के प्रति उनकी सुदृढ़ और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का परिचायक है। उन्होंने विभिन्न द्विपक्षीय क्षेत्रों में हो रही प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक एवं भू-आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देशों की आर्थिक सहभागिता को और मजबूत करना समय की आवश्यकता बन गया है।
राष्ट्रपति ने वर्ष 2024 में भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के मध्य संपन्न हुए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते को संबंधों में नया मोड़ बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश प्रवाह को सुगम बनाने तथा 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने की यह प्रतिबद्धता प्राथमिक क्षेत्रों में आपसी सहयोग को ठोस आधार देगी।
बैठक के दौरान लिकटेंस्टाइन की कंपनियों की भारतीय बाजार में रुचि का भी उल्लेख किया गया। राष्ट्रपति ने कहा कि वहां की कई प्रमुख फर्में उन्नत विनिर्माण, फिनटेक, कृषि अनुसंधान, पर्यावरण अनुकूल अवसंरचना, स्वास्थ्य देखभाल और पदार्थ विज्ञान में काम करने के प्रति उत्सुक हैं। उन्होंने उद्योग जगत और शिक्षण संस्थानों के समन्वय से कौशल विकास तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण की संभावनाओं को भुनाने पर बल दिया।
व्यापारिक संभावनाओं को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि वित्तीय सेवाओं, उच्चस्तरीय विनिर्माण और नवाचार में लिकटेंस्टाइन की दक्षता को भारत के दक्ष कार्यबल, विशाल विनिर्माण आधार और तेजी से उभरते बाजार के साथ जोड़कर दोनों पक्ष एक-दूसरे के लिए लाभकारी तंत्र बना सकते हैं।
वार्ता के अंत में दोनों पक्षों ने इस बात पर पूर्ण सहमति व्यक्त की कि यह प्रगाढ़ साझेदारी दोनों देशों के नागरिकों के लिए दूरगामी लाभ सुनिश्चित करेगी। साथ ही यह माना गया कि वंशानुगत राजकुमार एलोइस की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा और गति देने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।