केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी स्थिति में लाने के लिए एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता रेखांकित की है। उन्होंने निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार घरेलू उद्योग के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने के लिए पूरी तरह समर्पित है, जिससे विश्व स्तर पर भारत की छवि एक भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार के रूप में और सुदृढ़ हो सके।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक व्यापार परिदृश्य में आ रहे तीव्र परिवर्तनों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भू-राजनीतिक अस्थिरता, शुल्कों (टैरिफ) के बदलते ढांचे, आपूर्ति श्रृंखलाओं का पुनर्गठन तथा प्रमुख विदेशी बाजारों में नए विनियामक प्रावधानों का लागू होना अंतरराष्ट्रीय व्यापार की परिस्थितियों को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।
वाणिज्य मंत्रालय के हवाले से पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हो रहे ये बदलाव निर्यातकों के सामने कई चुनौतियां जरूर पेश करते हैं, लेकिन साथ ही ये भारत को एक सक्षम, प्रतिस्पर्धी और विश्वसनीय व्यापारिक साझीदार के रूप में स्थापित करने के बेहतरीन अवसर भी प्रदान करते हैं।
उन्होंने देश के औद्योगिक क्षेत्र को इन वैश्विक परिवर्तनों के प्रति सतर्क और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाला बनने का आह्वान किया। केंद्रीय मंत्री ने निर्यातकों से कहा कि वे वैश्विक मूल्य श्रृंखला (ग्लोबल वैल्यू चेन) में भारत की हिस्सेदारी को मजबूती देने के लिए उत्पादन लागत घटाने, वस्तुओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार, नए प्रयोगों (इनोवेशन), समय पर आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के कड़े पालन पर विशेष ध्यान केंद्रित करें।
पीयूष गोयल ने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर भारत को विनिर्माण, सोर्सिंग और निवेश के एक प्रमुख केंद्र के तौर पर देखने का रुझान बढ़ा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीय उद्योगों और विदेशी साझेदारों के बीच निरंतर संवाद के जरिए इन सकारात्मक संभावनाओं को वास्तविक और ठोस व्यापारिक समझौतों में तब्दील किया जाना चाहिए।
एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल की भूमिका पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि परिषदें अपने विदेशी समकक्षों के साथ समन्वय बढ़ाएं, नए खरीदारों की तलाश करें और पुराने एवं नए दोनों तरह के बाजारों में व्यापारिक साझेदारियों का विस्तार करें। उन्होंने यह भी कहा कि बदलती मांग के मद्देनजर उत्पादों और बाजारों में विविधता लाना समय की मांग है।
केंद्रीय मंत्री ने परिषदों को उन विशिष्ट उत्पादों की पहचान करने का निर्देश दिया जिनमें निर्यात की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, ताकि बाजार-वार रणनीतियां बनाई जा सकें। उन्होंने परंपरागत क्षेत्रों में भारत के मजबूत पक्षों को बनाए रखते हुए उभरते हुए क्षेत्रों में नई क्षमताएं विकसित करने पर जोर दिया।
अंत में, उन्होंने व्यापार को सुगम बनाने (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस), व्यापारिक अवसंरचना को आधुनिक करने और निर्यातकों के समक्ष आने वाली समस्याओं को हल करने के सरकारी प्रयासों का उल्लेख किया। गोयल ने ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ को एक युगांतरकारी पहल करार दिया, जो विशेष रूप से एमएसएमई इकाइयों को निर्यात ऋण, अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की राह में आने वाली रुकावटों को समाप्त करने में सहायता करेगी।