भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने रविवार को ब्रसेल्स के भारतीय दूतावास में हीरा कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हीरा मूल्य शृंखला में भारत और बेल्जियम की साझेदारी की एक खास अहमियत है तथा दोनों देश दशकों से इस उद्योग में मजबूत व्यावसायिक साझेदार रहे हैं।
जारी किए गए आधिकारिक बयान में बताया गया कि राजेश अग्रवाल ने दोनों देशों को वैश्विक हीरा उद्योग की अहम कड़ी करार दिया। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ भारत हीरे की कटिंग और पॉलिशिंग के क्षेत्र में विश्व का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, वहीं दूसरी तरफ बेल्जियम की पहचान कीमती रत्नों और हीरों के एक बड़े वैश्विक व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित है।
दूतावास में हुई इस बैठक का मुख्य लक्ष्य बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच कारोबारी अवसरों का आकलन करना और उद्योग जगत के साथ संवाद को मजबूती देना था। इस दौरान प्रतिनिधियों ने प्रमुख बाजारों में मांग के हालात, वैश्विक व्यापार की दिशा, भविष्य की चुनौतियों और कारोबारी अवसरों पर अपनी राय रखी। वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि चर्चा के केंद्र में मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय हीरा व्यापार, बाजार के नए रुझान और दोनों देशों के ऐतिहासिक कारोबारी संबंध रहे।
मंत्रालय के अनुसार, इससे पहले 30 अक्टूबर को भी वाणिज्य सचिव ने इस क्षेत्र के हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया था। उस बैठक में भी वैश्विक हीरा बाजार की मौजूदा स्थिति, बदलती मांग और व्यापार के समक्ष आने वाली चुनौतियों व संभावनाओं पर चर्चा करते हुए उद्योग जगत से फीडबैक लिया गया था।
इसी क्रम में, हाल ही में भारत, बेल्जियम और लक्जमबर्ग ने भी अपने आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति दी है। भारत-बेल्जियम-लक्जमबर्ग आर्थिक संघ (बीएलईयू) के संयुक्त आर्थिक आयोग की 19वीं बैठक में नवाचार, अनुसंधान, एयरोस्पेस और उच्च शिक्षा के क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करने के अवसरों को तलाशा गया।
आयोग की इस बैठक में द्विपक्षीय निवेश और व्यापारिक संबंधों का जायजा लेने के साथ-साथ आर्थिक साझेदारी को और व्यापक बनाने पर जोर दिया गया। इसके तहत लॉजिस्टिक्स, बंदरगाह विकास, हवाई संपर्क, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ तकनीक, वित्तीय सेवाएं और फिनटेक में सहयोग बढ़ाने पर बात हुई। साथ ही, डिजिटल परिवर्तन, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, आयुर्वेद और कृषि व खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी आपसी भागीदारी को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की गई।