सत्ता के लिए तालिबान और हक्कानी नेटवर्क भिड़े

अफगानिस्तान में सत्ता को लेकर तालिबान और हक्कानी नेटवर्क में लड़ाई छिड़ गई है। अफगानिस्तान के अखबार ‘पंजशीर ऑब्जर्वर’ की रिपोर्ट के मुताबिक हक्कानी नेटवर्क की फायरिंग में तालिबान का को-फाउंडर मुल्ला बरादर घायल हो गया है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बरादर का इस समय पाकिस्तान में इलाज चल रहा है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

पंजशीर में 600 तालिबानी मारे गए
पंजशीर में तालिबान और अहमद मसूद की अगुआई वाली रेजिस्टेंस फोर्स के बीच जंग जारी है। इस बीच रेजिस्टेंस फोर्स ने दावा किया है कि शनिवार को उसने 600 तालिबानियों को मार गिराया और 1000 तालिबानियों ने या तो सरेंडर कर दिया या उन्हें पकड़ लिया गया। वहीं अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान का कहना है कि पंजशीर की राजधानी बाजारक और प्रांतीय गवर्नर के परिसर की ओर जाने वाली सड़कों पर लैंडमाइन होने की वजह से वे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजशीर में जारी जंग में पाकिस्तान के सैनिक तालिबान का साथ दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि पंजशीर में मारे गए एक पाकिस्तानी सैनिक का आई-कार्ड भी मिला है। बता दें पाकिस्तान पर तालिबान की मदद करने और उसे बढ़ावा देने के आरोप काफी समय से लगते रहे हैं और अफगानिस्तान पर तालिबानी कब्जे के पीछे भी पाकिस्तान का हाथ होना बताया जा रहा है।

अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार के ऐलान से पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद के काबुल पहुंचने को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इस बीच अफगानिस्तान की पूर्व सांसद मरियम सोलाइमनखिल ने कहा है कि ISI चीफ काबुल इसलिए पहुंचे हैं ताकि आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क के नेता को तालिबानी सरकार का प्रमुख बनवा सकें और मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को प्रमुख बनने से रोक सकें।मरियम ने ये भी कहा है कि तालिबानी गुटों और मुल्ला बरादर के बीच कई मुद्दों पर असहमति है और बरादर ने अपने लोगों को पंजशीर में चल रही जंग से दूर कर लिया है। बता दें कि मरियम के बयान से पहले तक ये अटकलें थीं कि मुल्ला बरादर ही तालिबानी सरकार का प्रमुख होगा।

अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ महिलाओं का विरोध-प्रदर्शन शनिवार को हिंसक हो गया। काबुल में महिलाओं के अधिकारों की आवाज उठा रहीं एक्टिविस्ट्स को तालिबानियों ने आंसू गैस छोड़कर रोकने की कोशिश की। दो दिन से प्रदर्शन कर रहीं इन महिलाओं का कहना है कि नई सरकार में उनकी भागीदारी होनी चाहिए और अहम भूमिका मिलनी चाहिए।

काबुल में महिलाओं के प्रदर्शन के दौरान तालिबान ने उन पर जानलेवा हमला भी किया। महिला कार्यकर्ता नरगिस सद्दात ने आरोप लगाया कि शनिवार को महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान तालिबान ने उनसे मारपीट की। उनके चेहरे पर चोट के निशान भी हैं।

नरगिस ने बताया कि तालिबानियों ने उनके चेहरे पर बंदूक की बट से हमला किया। जिसके बाद उनके चेहरे से खून निकलने लगा। टोलो न्यूज के मुताबिक तालिबान ने मार्च निकाल रही महिलाओं को राष्ट्रपति भवन की ओर जाने से रोका और उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े। कई पत्रकारों ने भीड़ पर फायरिंग का भी आरोप लगाया है।

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