अफगानिस्तान में जल्द नई सरकार की घोषणा हो सकती है। सोमवार तक सरकार बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण तक पहुंच चुकी है। सरकार बनाने से पहले तालिबान ने 6 देशों को समारोह में बुलावा भेजा है। इनमें तुर्की, चीन, रूस, ईरान, पाकिस्तान और कतर शामिल हैं।
तालिबान ने चुन चुनकर उन देशों को न्योता भेजा है, जिनके अमेरिका से खराब और तालिबान से बेहतर रिश्ते हैं। कतर को छोड़कर ये सभी देश ऐसे हैं, जिनकी अमेरिका से बिल्कुल भी नहीं बनती है।
ट्रंप के कार्यकाल में भारत और अमेरिका के रिश्तों में सुधार हुआ था तो वहीं पाकिस्तान के साथ रिश्ते कुछ हद तक खराब हुए थे। ईरान पर अमेरिका ने कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। वहीं चीन और रूस के साथ US की कोल्ड वॉर चल रही है। तालिबान दोनों ही देशों से बेहतर रिश्ते की उम्मीद जाहिर कर चुका है। बताया जाता है कि जो बाइडेन तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोगन को पसंद नहीं करते हैं।
तालिबान ने अफगानिस्तान में लड़कियों को पढ़ाई करने की इजाजत तो दी है, लेकिन उन्हें कड़ी पाबंदियों से भी गुजरना पड़ रहा है। सोमवार को मजार ए शरीफ में स्थित इब्न ए सिना यूनिवर्सिटी की फोटो सामने आई है। इसमें क्लास को पर्दे के जरिए 2 भागों में बांट दिया गया है। एक तरफ लड़के बैठे हुए हैं और दूसरी तरफ लड़कियां। पंजशीर में विद्रोही नेताओं के लीडर अमरुल्ला सालेह ताजिकिस्तान भाग गए हैं। एक दिन पहले ही सालेह ने ब्रिटिश न्यूज पेपर में लिखे अपने आर्टिकल में कहा था कि वो तालिबानियों के आगे सरेंडर करना नहीं चाहते। इस आर्टिकल में उन्होंने अपनी फैमिली को लेकर डर की बात भी जाहिर की थी।