आज यानी 8 अक्टूबर को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति कमिटी (MPC) की 3 दिवसीय बैठक खत्म हो गई है। RBI ने रेपो रेट 4% पर और रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर बरकरार रखा है। यह लगातार 8वीं बार है जब दरों को जस का तस रखा गया है। इससे पहले मई 2020 में रेपो रेट को घटाया गया था।RBI गर्वनर शक्तिकांता दास ने कहा कि सभी MPC सदस्य दरें बरकरार रखने के पक्ष में है। अकोमडेटिव रुख बरकरार रखने में MPC ने 5-1 से ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इकोनॉमी में रिकवरी के साफ संकेत दिख रहे हैं। अगस्त, सितंबर में मांग में रिकवरी दिखी है और खाद्य महंगाई दर में कमी आई है। निवेश में सुधार शुरुआती दौर में देखने को मिल रहा है। जुलाई-अगस्त में महंगाई दर अनुमान से कम है। RBI महंगाई को नियंत्रण में करने की कोशिश कर रही है। कृषि उत्पादन से ग्रामीण मांग में तेजी आएगी साथ ही उन्होंने कहा कि त्योहारों में शहरी मांग बढ़ने की उम्मीद है।
RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में GDP ग्रोथ के अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया है। RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान 9.5% पर बरकार रखा है। RBI ने कहा कि जुलाई-सितंबर 2021 में GDP ग्रोथ 7.9%, अक्टूबर-दिसंबर 2021 में 6.8% और जनवरी-मार्च 2022 में 6.1% रह सकती है। RBI फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में रीयल GDP ग्रोथ 17.2% रहने का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे महंगाई दर में कमी लाएंगे।रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि जुलाई-अगस्त में CPI इनफ्लेशन में नरमी आई है। डिमांड आउटलुक में सुधार हो रहा है। केंद्रीय बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के लिए खुदरा महंगाई दर (CPI) का अनुमान 5.3% कर दिया है। अगस्त की पॉलिसी समीक्षा में RBI ने रिटेल महंगाई दर 5.7% रहने का अनुमान जताया था। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 की पहली तिमाही के लिए RBI ने रिटेल महंगाई दर का अनुमान 5.2% जताया है।
RBI ने स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए स्पेशल लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन (SLTRO) की सुविधा 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है। इसके साथ ही इमिडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) लिमिट 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए की गई है। RBI गवर्नर ने कहा कि लिक्विडिटी मुहैया कराने पर RBI का फोकस। रजिस्टर्ड NBFCs को बैंक 6 महीने और लोन दे सकेंगे।रेपो रेट वह दर है, जिस पर RBI द्वारा बैंकों को कर्ज दिया जाता है। बैंक इसी कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने का अर्थ होता है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के लोन सस्ते हो जाएंगे। जबकि रिवर्स रेपो रेट, रेपो रेट से ठीक विपरीत होता है। रिवर्स रेट वह दर है, जिस पर बैंकों की ओर से जमा राशि पर RBI से ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट के जरिए बाजारों में लिक्विडिटी यानी नकदी को नियंत्रित किया जाता है। यानी रेपो रेट स्थिर होने का मतलब है कि बैंकों से मिलने वाले लोन की दरें भी स्थिर रहेंगी।