कोयला संकट पर एक्शन में PMO:थर्मल पावर स्टेशनों पर कोयले की स्थिति की समीक्षा करेगा PMO

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के कुछ राज्यों में बिजली संकट की आहट शुरू हो गई है। देश के कई पावर प्लांट्स में 3 से 5 दिन का ही कोयले का स्टॉक बचा है। हालात को देखते हुए ये आशंका जताई जा रही है कि ये संकट और गहरा सकता है। इसी बीच आज प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) थर्मल पावर स्टेशनों पर कोयले की स्थिति की समीक्षा करेगा। इससे पहले बिजली मंत्रालय ने नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) और दामोदर वेली कॉर्पोरेशन (DVC) को निर्देश जारी किया है कि वे दिल्ली में संभावित कमी के कारण जितनी बिजली की मांग है, उतनी बिजली की आपूर्ति करें।

बिजली मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली की कंपनियों को उनकी मांग के मुताबिक जितनी बिजली की जरूरत होगी उतनी ही बिजली मिलेगी। पिछले 10 दिनों में दिल्ली डिस्कॉम को दी गई घोषित क्षमता (DC) को ध्यान में रखते हुए, बिजली मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को 2021 को NTPC और DVC को निर्देश जारी किए थे। जिससे दिल्ली को बिजली की आपूर्ति सुरक्षित की जा सके। इससे वितरण सुनिश्चित होगा।

NTPC और DVC दिल्ली डिस्कॉम्स को उनके कोल बेस्ड पावर स्टेशन से संबंधित पावर पर्चेज एग्रीमेंट (PPA) के तहत डिक्लेयर्ड कैपेसिटी की पेशकश कर सकते हैं। दिल्ली डिस्कॉम्स जितनी बिजली की मांग करती हैं, उतनी बिजली दोनों कंपनियां उपलब्ध करवाएंगी।NTPC दिल्ली डिस्कॉम्स को उनके आवंटन (गैस बेस्ड पावर स्टेशन) के अनुसार डिक्लेयर्ड कैपेसिटी की पेशकश कर सकती है। दिल्ली डिस्कॉम्स को SPOT, LT-RLNG जैसे सभी सोर्सेस से उपलब्ध गैस दी जा सकती है।

यह कदम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा कोयले की कमी के कारण दिल्ली में बिजली संकट की चेतावनी देने के बाद उठाया है। देश के कुछ पूर्वी और उत्तरी राज्यों ने बिजली कटौती शुरू कर दी है।

कोयला आधारित बिजली उत्पादन से बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए 11 अक्टूबर 2021 को आवंटित बिजली के उपयोग के संबंध में भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।इन दिशा-निर्देशों के तहत राज्यों से राज्य के उपभोक्ताओं को बिजली की आपूर्ति के लिए आवंटित बिजली का उपयोग करने का अनुरोध किया गया है।यदि कोई राज्य पावर एक्सचेंज में बिजली बेचता हुआ पाया जाता है या इस आवंटित बिजली को शेड्यूल नहीं कर रहा है, तो उनकी असंबद्ध शक्ति को अस्थायी रूप से कम या वापस लिया जा सकता है और अन्य राज्यों को फिर से आवंटित किया जा सकता है, जिन्हें ऐसी बिजली की आवश्यकता होती है।

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