सरकार ने टेलीकॉम इंडस्ट्री को राहत देने के लिए स्पेक्ट्रम की कीमत चार साल बाद चुकाने का जो पैकेज बनाया है, उसे वोडाफोन आइडिया ने स्वीकार कर लिया है। वोडाफोन आइडिया ने इस बारे में सरकार को बता दिया है और वह स्पेक्ट्रम के लिए पेमेंट मोराटोरियम का ऑफर स्वीकार करने वाली पहली टेलीकॉम कंपनी है।
नकदी की तंगी से जूझ रही टेलीकॉम कंपनी ने दूरसंचार विभाग (DoT) से यह भी पूछा है कि स्पेक्ट्रम के लिए पेमेंट को लेकर उसने जो बैंक गारंटी दी थी, वह कब वापस मिलेगी। उसने कहा है कि एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) पेमेंट पर मोराटोरियम और डेफर्ड पेमेंट पर लगने वाले इंटरेस्ट को इक्विटी में बदलने का ऑप्शन चुनेगी या नहीं, यह बाद में बताएगी।AGR पेमेंट में मोराटोरियम चाहिए या नहीं, यह बताने के लिए कंपनी के पास 29 अक्टूबर तक का वक्त है। मामले के जानकार सूत्र ने कहा, ‘Vi ने स्पेक्ट्रम का पेमेंट चार साल बाद देने का विकल्प चुना है। उसने अपनी बैंक गारंटी के डिटेल भी मांगे हैं। क्या कंपनी AGR का पेमेंट बाद में देना चाहती है और पेमेंट के ब्याज को इक्विटी में बदलना चाहती है, इस बारे में DoT को बाद में बताएगी।’
सरकार ने कर्ज से दबी टेलीकॉम कंपनियों के लिए सितंबर के मध्य में राहत पैकेज जारी किया था। इस पैकेज में चार साल बाद स्पेक्ट्रम की कीमत और एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) चुकाने का ऑप्शन है। इसके अलावा बैंक गारंटी भी घटा दी गई है और सरकार की बकाया रकम को इक्विटी में बदलने का भी विकल्प दिया गया है।राहत पैकेज से टेलीकॉम सेक्टर की हालत बदल गई। Vi को कैश फ्लो को लेकर हो रही दिक्कत दूर हो गई। अगर कंपनी AGR और बकाया स्पेक्ट्रम चार साल बाद चुकाने का ऑप्शन चुनती है तो उसे कैशफ्लो के तौर पर हर साल लगभग 25,000 करोड़ रुपए की बचत होगी। सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को बकाया मूल के अलावा ब्याज के भुगतान को चार साल बाद सरकार की इक्विटी में बदलने का भी विकल्प दिया है।
दूरसंचार विभाग (DoT) ने पिछले शुक्रवार को भारती एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया को यह बताने के लिए 29 अक्टूबर तक का समय दिया था कि क्या वे मोराटोरियम चाहती हैं? कंपनियों के पास इक्विटी कनवर्जन का ऑप्शन यूज करने के लिए 90 दिन का समय होगा। कंपनी पर 1.9 लाख करोड़ की देनदारी है जिसमें से 1.6 लाख करोड़ रुपए का सरकार का बकाया है।
Vi के मैनेजिंग डायरेक्टर रविंदर टक्कर ने हाल में कहा था कि कंपनी सरकार की बकाया रकम को मोराटोरियम के बाद इक्विटी में बदलने को तैयार है। उन्होंने कहा था कि चार साल के मोराटोरियम से घाटे में चल रही कंपनी का वजूद बच जाएगा और वह कॉम्पिटिटिव भी हो जाएगी। 23,000-25,000 करोड़ की बैंक गारंटी वापस मिलने से बैंकों के साथ रिश्ते बेहतर हो सकेंगे।