चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने कहा कि चीन के साथ LAC समेत दूसरे मसलों को बातचीत के जरिए सुलझाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संदेह की स्थिति बरकरार है। ऐसे में मुद्दों को हल करने में समय लगता है। गुवाहाटी में शनिवार को एक कार्यक्रम के दौरान CDS रावत ने कहा कि चीन के साथ सीमा मुद्दे को व्यापक रूप से देखना चाहिए। उत्तर-पूर्व या लद्दाख के मसले को अलग करके न देखें।
जनरल रावत ने कहा कि 2020 में हमें थोड़ी समस्या हुई थी। मुद्दों को अब सैन्य स्तर, विदेशी मामलों के स्तर और राजनीतिक स्तर पर होने वाली बातचीत के जरिए हल किया जा रहा है। हमें पूरा विश्वास है कि हम अपने सीमा मुद्दों को हल कर लेंगे। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। सीमा विवाद पहले भी रहा है और उन्हें हल करने में सक्षम हैं।
CDS ने कहा कि सुमदोरोंग चू में भी ऐसा ही हुआ था, इसे हल करने में बहुत लंबा समय लग गया। वास्तव में, इस बार यह 1980 के दशक की तुलना में बहुत तेजी से हल हो रहा है। उन्होंने कहा कि आपको अपने सिस्टम में विश्वास होना चाहिए, विशेष रूप से अपने सशस्त्र बलों पर भरोसा रखना होगा।चीन बॉर्डर एरिया की जमीन के संरक्षण और शोषण को लेकर नया कानून लेकर आया है। चीनी संसद ने यह कहते हुए कानून पास किया कि चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पवित्र और अहिंसक है। इस नए कानून का भारत-चीन सीमा विवाद पर असर पड़ सकता है। 1 जनवरी, 2022 से यह कानून लागू होगा। इस कानून में यह भी कहा गया है कि चीन समानता, आपसी विश्वास के सिद्धांत का पालन करेगा और लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों को बातचीत के जरिए हल करेगा।
उन्होंने कहा कि चीन हिंद महासागर क्षेत्र के देशों में लोकप्रियता हासिल करने के लिए धन-बल का इस्तेमाल करता है और पड़ोसी देशों के कर्ज के जाल में फंसने का खतरा है। उन्होंने कहा कि भारत को समुद्री पड़ोसियों को समझाना चाहिए कि वह लंबे समय के लिए उनका मित्र है।CDS रावत ने इस बात पर जोर दिया कि देश को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि उसके पड़ोस में फैली अस्थिरता से निपटा जाए। यह हमारी तात्कालिक प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि काबुल में तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के बाद अफगानिस्तान की स्थिति की वजह से जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए भी खतरे की आशंका है, लेकिन आंतरिक निगरानी पर काम करके इस खतरे से निपटा जा सकता है।