RBI गवर्नर शक्तिकांता दास को तीन साल का एक्सटेंशन

सरकार ने रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांता दास को 3 साल का एक्सटेंशन दे दिया है। वे अब इस पद पर 2024 तक बने रहेंगे। दास ने 12 दिसंबर 2018 में RBI के गवर्नर का पद संभाला था। उन्होंने उर्जित पटेल की जगह ली थी। उर्जित पटेल ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा दे दिया था।

शक्तिकांता दास को पहली बार एक्सटेंशन मिला है। उन्हें एक्सटेंशन ऐसे समय में मिला है, जब एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत की इकोनॉमी रिकवरी के रास्ते पर है। कोरोना के समय में देश की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आई थी और उसे रास्ते पर लाने का काम शक्तिकांता दास के ही अगुवाई में किया गया।शक्तिकांता दास को एक्सटेंशन का फैसला देर रात लिया गया। देर रात अप्वाइंटमेंट कमिटी ऑफ कैबिनेट (ACC) ने उनके सेवा एक्सटेंशन को मंजूरी दी। 64 वर्षीय दास महंगाई और विकास दोनों को साधते हुए अर्थव्यवस्था में जान फूंकने का काम करते रहे। रिजर्व बैंक का महंगाई का लक्ष्य 6% से नीचे रखने का था और साथ ही ग्रोथ को बनाए रखने का था। दोनो मोर्चे पर रिजर्व बैंक ने पिछले डेढ़ साल में कोरोना के समय में सफलता हासिल की।

इस दौरान लगातार ब्याज दरों में कटौती और तमाम राहत पहुंचाने के फैसले पर काम होता रहा। यही कारण है कि आज ऐतिहासिक रूप से देश में लोन और डिपॉजिट दोनों पर ब्याज दरें एकदम निचले स्तर पर हैं। लोन की ब्याज दरें 6.44% पर हैं, जबकि डिपॉजिट की दरें 5% पर पहुंच गई हैं।

शक्तिकांता दास 1980 बैच के IAS अधिकारी हैं। वे तमिलमाडु कैडर के अधिकारी हैं। 2017 मई तक वे इकोनॉमिक अफेयर्स के सेक्रेटरी थे। वे देश के 25 वें गवर्नर बने थे। नवंबर 2016 में जब नोटबंदी हुई थी, तब भी दास ही मुख्य मोर्चे पर थे। दास पिछले 38 सालों से विभिन्न पदों पर रहे हैं। दास ने 15 वें फाइनेंस कमीशन में भी सदस्य के रूप में काम किया था। दास ने भारत की ओर से ब्रिक्स, इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड और सार्क में प्रतिनिधित्व किया है। वे दिल्ली से स्टीफन कॉलेज से पोस्ट ग्रेजुएट हैं।

दास ने पिछली मौद्रिक नीति की समीक्षा में कहा था कि हम बहुत संकट वाले चरण में हैं और हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि हम इससे बाहर निकल सकें। रिजर्व बैंक का अनुमान है कि वित्तवर्ष 2022 में देश की इकोनॉमी 9.5% की दर से बढ़ेगी। पिछले साल देश की इकोनॉमी में 7.3% की गिरावट दर्ज की गई थी

वैसे अनुमान है कि रिजर्व बैंक अब दरों को स्थिर रखने या घटाने की बजाय बढ़ाने पर विचार कर सकता है। अगले साल की शुरुआत में इस पर फैसला हो सकता है। देश की रिटेल महंगाई दर सितंबर में 4.35% थी जो कि अगस्त में 5.3% थी। यह पांच साल के निचले स्तर पर है।

वैसे इससे पहले मोदी सरकार ने एलआईसी, एसबीआई, यूनियन बैंक और पंजाब नेशनल बैंक सहित कई चेयरमैन और एमडी को पिछले 2 साल में एक्सटेंशन दिया है।

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