रेलवे मंत्रालय ने फैसला वापस लिया:

आज IRCTC के शेयर में भारी उतार-चढ़ाव रहा। सुबह शेयर 25% गिरावट के साथ 650 रुपए पर चला गया। इसका मार्केट कैप कुछ ही मिनट में 14 हजार करोड़ रुपए घट कर 58 हजार करोड़ रुपए पर चला गया था। कल मार्केट कैप 74 हजार करोड़ रुपए था।हालांकि शेयर्स में गिरावट के तुरंत बाद रेलवे मंत्रालय ने फैसला पलट दिया है। डिपॉर्टमेंट ऑफ पब्लिक असेट एंड मैनेजमेंट (दीपम) ने सोशल मीडिया पर कहा कि सर्विस चार्ज में आधा हिस्से लेना का फैसला वापस लिया जा रहा है। इसके बाद कंपनी का शेयर 650 रुपए से बढ़कर 901 रुपए पर पहुंच गया। यानी महज 2 घंटे में इस प्रति शेयर करीबन 270 रुपए का उतार चढ़ाव देखा गया। मार्केट कैप 58 हजार करोड़ से बढ़कर 74 हजार करोड़ रुपए हो गया है।

IRCTC के शेयर्स में भारी गिरावट का कारण यह है कि रेलवे मंत्रालय ने कल एक फैसला किया। मंत्रालय ने कहा कि IRCTC को जो भी कन्वेंस फीस (सर्विस चार्ज) मिलती है, उसका आधा हिस्सा उसे चाहिए। यह व्यवस्था महामारी की शुरुआत के बाद से रोक दी गई थी। IRCTC ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि रेलवे ने कहा है कि राजस्व साझा करने की व्यवस्था एक नवंबर से लागू होगी।

ब्रोकरेज हाउस के.आर. चौकसी के एमडी देवेन चौकसी के मुताबिक, IRCTC को वित्तवर्ष 2023 में सर्विच चार्ज के रूप में 740 करोड़ रुपए जबकि 2024 के वित्तवर्ष में 780 करोड़ रुपए का सर्विस चार्ज मिल सकता है। अनुमान है कि वित्तवर्ष 2023 में कंपनी 43 करोड़ टिकट की बुकिंग कर सकती है।ग्राहकों से लिया जाने वाला सर्विस चार्ज टिकट के भाड़े में शामिल नहीं होता और यह वेबसाइट के जरिये टिकट बुक करने की IRCTC द्वारा सुविधा देने के लिए वसूला जाता है। कंपनी के मुताबिक राजस्व साझा करने का यह नियम एक नवंबर से लागू किया जाएगा। एक नवंबर के बाद से कंपनी टिकट बुकिंग पर मिलने वाले सर्विस चार्ज में 50% हिस्सा सरकार को देगी।

2020-21 में IRCTC को कन्वेंस फीस के रूप में 299 करोड़ रुपए मिले थे। 2019-20 में इसे इसी चार्ज से 349 करोड़ रुपए मिले थे। कोरोना की वजह से पिछले साल इसकी कन्वेंस फीस में गिरावट आ गई थी। 2014 से पहले IRCTC इस तरह की फीस में कोई भी शेयरिंग रेलवे मंत्रालय के साथ नहीं करती थी। 2014 के बाद IRCTC और मंत्रालय के बीच 80-20 के अनुपात में रेवेन्यू शेयरिंग का फैसला हुआ। 2015 में इस अनुपात को बदलकर बराबर यानी 50-50 के अनुपात में कर दिया गया। हालांकि नवंबर 2016 के बाद इस फैसले को तीन साल के लिए खत्म कर दिया गया था।

जानकारों का कहना है कि रेलवे के इस फैसले से उसे 300-400 करोड़ रुपए मिल सकते हैं, पर इसका सीधा असर IRCTC के शेयर्स पर दिखेगा। जैसा कि फैसले के पहले दिन दिखा है। कोरोना के समय में IRCTC ने हर दिन 7 लाख टिकट बुक किया है। अब यह बढ़कर 13 लाख टिकट हर दिन हो गया है।IRCTC कन्वेंस फीस के रूप में बिना एसी वाले टिकट पर 20 रुपए और टैक्स लगाती थी।

एसी वाले टिकट पर 40 रुपए का चार्ज और टैक्स लगाया जाता था। यह व्यवस्था 2016 तक नोटबंदी से पहले थी। पर नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट होने से सितंबर 2019 से उसने बिना एसी वाले टिकट के लिए 15 रुपए और जीएसटी तथा एसी वाले टिकट के लिए 30 रुपए और जीएसटी लगा दिया।

बता दें कि बुधवार को IRCTC का शेयर्स 15% दिन में बढ़ा था। हालांकि बाजार बंद होते समय इसमें 10% की बढ़त थी। बुधवार को इसके शेयर में विभाजन हुआ। इसके एक शेयर को बांट कर 5 शेयर कर दिया गया। हालांकि उससे पहले इसका शेयर 6300 रुपए को पार कर गया था। मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपए हो गया था। पर अब इसका मार्केट कैप करीबन 45% घट गया है।

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