रुपे डेबिट कार्ड के इस्तेमाल और BHIM-UPI के जरिए 2,000 रुपए तक के पर्सन टू मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन को प्रमोट करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने सोमवार को इंसेंटिव स्कीम को मंजूरी दी।
पर्सन टू मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का मतलब है व्यापारी और ग्राहक के बीच किया गया UPI ट्रांजैक्शन। इस स्कीम पर करीब 1,300 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 1 अप्रैल 2021 से स्कीम लागू मानी जाएगी। रूपे डेबिट कार्ड को प्रमोट करने का सीधा असर ग्लोबल पेमेंट कंपनीज वीजा और मास्टरकार्ड पर पड़ सकता है।
इस स्कीम के तहत, एक्वायरिंग बैंक्स को सरकार RuPay और BHIM-UPI सिस्टम के जरिए किए गए ट्रांजैक्शन की वैल्यू का परसेंटेज देगी। एक्वायरिंग बैंक का मतलब है ऐसे सभी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन जो व्यापारियों के लिए क्रेडिट या डेबिट कार्ड पेमेंट को प्रोसेस करते हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस स्कीम को लेकर कहा, ‘रुपे और यूपीआई पेमेंट सिस्टम को डेवलप करने के लिए, भारत सरकार पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को रिम्बर्स करेगी।
MDR का मतलब वो चार्ज है जो डेबिट और क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने के लिए व्यापारियों से लिया जाता है। डेबिट और क्रेडिट कार्ड एक्सेप्ट करने के लिए, व्यापारियों को इस सर्विस को लेना पड़ता है। आमतौर पर MDR फीस 1% -3% के बीच होती है।
अश्विनी वैष्णव ने ये भी कहा कि ‘यह इंसेंटिव डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इन्वेस्टमेंट की तरह होगा। सरकार 1300 करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट करेगी ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग डिजिटल पेमेंट को अपना सकें।’
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नवंबर के महीने में देश में रिकॉर्ड 423 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन हुए। ट्रांजैक्शन की वैल्यू 7,56,000 करोड़ रुपए थी। नई इंसेंटिव स्कीम बैंकों को मजबूत डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बनाने में मदद करेगी।
रुपे और यूपीआई को और प्रमोट करने के मोदी सरकार के आज के फैसले से ग्लोबल पेमेंट कंपनीज वीजा और मास्टरकार्ड की परेशानी बढ़ सकती है। ये कंपनियां पहले ही सरकार की ओर से रुपे कार्ड को प्रमोट किए जाने की शिकायत कर चुकी हैं।
पिछले महीने, वीजा ने अमेरिकी सरकार से शिकायत की थी कि भारत सरकार की ओर से RuPay के प्रमोशन से कंपनी को एक नुकसान हुआ है।
कुछ ही सालों में RuPay भारत में लीडिंग डेबिट कार्ड नेटवर्क बन गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में भारत के कार्ड मार्केट के 60% हिस्से पर इंडियन पेमेंट नेटवर्क कब्जा करने में कामयाब रहा है। 2017 में इसका शेयर सिर्फ 15% था।