31 अगस्त 2021 को नागेंद्र रोरिया नाम का कस्टमर किआ सेल्टॉस की बुकिंग करता है। वो नवरात्रि के मौके पर अपनी फैमिली को सरप्राइज देना चाहता था, लेकिन कार की डिलीवरी नहीं मिली। हां, डिलीवरी की नई तारीख जरूर मिली। जब वो तारीख आई तब एक बार फिर नई तारीख मिली। ये सिलसिला 3 महीने से चल रहा है। डिलीवरी का अभी भी पता नहीं। नौबत कार बुकिंग कैंसिलेशन पर आ चुकी है। जाहिर सी बात है कि मामले में गलती कार डीलर की है।
डीलर ने कई बार कार डिलीवरी का कमिटमेंट किया और हर बार तोड़ा। देश में 7 लाख से ज्यादा ग्राहक अपनी कार डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं। सवाल ये उठता है कि आखिर ऐसा हुआ क्यों? इसका जवाब सेमीकंडक्टर (चिप) की कमी से जुड़ा है। इसकी कमी ने दुनियाभर में कार प्रोडक्शन को हिलाकर रख दिया है। हालांकि अब केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर की कमी से निपटने के लिए 76 हजार करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की है। यानी देश को इस दिशा में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
अभी सेमीकंडक्टर के लिए हम चीन, ताइवान, कोरिया जैसे देशों पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकार के इस कदम से ये पूरी कहानी बदल सकती है। देश में सेमीकंडक्टर के प्रोडक्शन के क्या-क्या फायदे होंगे। सरकार के इस फैसला का चीन पर क्या असर होगा?ये बात किसी से छिपी नहीं है कि सेमीकंडक्टर की कमी से ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई कंपनियों को लंबे समय तक प्रोडक्शन बंद करना पड़ा, तो कई कंपनियों के प्लांट तक बंद हो गए। कोविड-19 महामारी से शुरू हुई चिप की कमी देखते ही देखते दुनियाभर की कंपनियों के लिए सिरदर्द बन गई। कार के साथ वो प्रोडक्ट्स जिनमें चिप का इस्तेमाल किया जाता है, उनकी डिलीवरी समय पर नहीं मिल पा रही है। वैक्सीनेशन के बाद महामारी पर कंट्रोल तो आ गया, लेकिन चिप की कमी जस की तस है।
सेमीकंडक्टर की कमी का असर सभी कार कंपनियों पर हुआ है। देश की सबसे बड़ी कार मैन्युफैक्चर कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया के 2.5 लाख ग्राहकों को कार डिलीवरी का इंतजार है। हुंडई, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के 1-1 लाख ग्राहकों को डिलीवरी का इंतजार है।
इस बारे में यूट्यूबर और ऑटो एक्सपर्ट अमित खरे (आस्क कारगुरु) ने बताया कि सरकार का ये फैसला बेहद शानदार है। हालांकि सेमीकंडक्टर बनाना आसान टास्क नहीं है। इसका प्रोडक्शन पहले दिन से शुरू नहीं होता है। इसके एक बैच पर जब काम शुरू होता है तो वो 6 महीने के बाद तैयार होता है। सेमीकंडक्टर के प्लांट लगाने में कम से कम 2 साल का वक्त लग जाएगा। इसके बाद जब प्रोडक्शन का काम शुरू होगा, तब उसमें 6 महीने या सालभर का समय लग जाएगा। यानी सेमीकंडक्टर के लिए मिनिमम 3 साल का इंतजार करना होगा।
शुरुआत में छोटे सेमीकंडक्टर का प्रोडक्शन किया जा सकता है, जो छोटे गैजेट्स या इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होते हैं। हमारे चिप की कीमत भी कम होगी। जब प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा, तब दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता धीरे-धीरे कम हो जाएगी। इससे चीन, जापान, ताइवान जैसे देशों में जो कंपनियां सेमीकंडक्टर तैयार कर रही हैं, उनके ऊपर से प्रेशर कम होगा। ऐसे में वे भी ज्यादा बेहतर सेमीकंडक्टर तैयार कर पाएंगे। कुल मिलाकर इसके रिजल्ट के लिए हमें सालों का इंतजार करना होगा।