नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (NRDA) के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन में बातचीत की शुरुआती कोशिश बेनतीजा खत्म हो गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिव डहरिया और प्रभावित गांवों के सरपंचों के बीच आपसी समझ नहीं बन पाई। मंत्री ने कहा, सरपंचों को NRDA ने बहुत काम दिया है। वे ग्रामीणों को समझा बुझाकर आंदोलन खत्म कराएं। सरपंचों ने साफ शब्दों में इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। नवा रायपुर के एक सरपंच ने यहां तक कह दिया कि सरकार मांगे पूरी करे वे सरपंच पद से इस्तीफा देने को भी तैयार हैं।
नई राजधानी प्रभावित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष रूपन चंद्राकर ने बताया, क्षेत्रीय विधायक और नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिव डहरिया ने नवा रायपुर क्षेत्र के सरपंचों को बातचीत के लिए बुलाया था। इसमें नवागांव खपरी, कयाबांधा, राखी, छतौना, कोटराभांठा, कोटनी और उपरवारा के सरपंचों के अलावा पूर्व सरपंच और जिला पंचायत सदस्य आदि शामिल हुए थे। सरपंचों ने वहां ग्रामीण आंदोलनकारियों की ओर से उठाई जा रही मांगों को रखा। बताया जा रहा है कि मंत्री डॉ. शिव डहरिया ने इसपर कोई सीधा आश्वासन नहीं दिया। उनका जोर आंदोलन को खत्म कराने पर ही था।
सरपंचों से कहा गया, आप पार्टी के लोग हो। NRDA के जरिए आपको बहुत काम मिला हुआ है। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे सरकार और NRDA का साथ दें। ग्रामीणों को समझाएं ताकि आंदोलन खत्म कर वे लोग घर जाएं। रूपन चंद्राकर का कहना था, सरपंचों ने ऐसा करने से मना दिया। कुछ सरपंचों ने वहीं कह दिया कि सरकार ग्रामीणों की मांग पूरी कर दे। वे लोग अपने पद से इस्तीफा देने को भी तैयार हैं। इसके साथ ही यह बातचीत टूट गई। सरपंचों ने आंदोलन स्थल पर जाकर ग्रामीणों को बातचीत का ब्यौरा दिया।नई राजधानी प्रभावित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष रूपन चंद्राकर ने कहा, वे लोग सरकार से बातचीत को तैयार हैं। मंत्री वार्ता के लिए अपने आवास पर बुला रहे हैं। समिति ने तय किया है कि मंत्री के आवास पर कोई वार्ता नहीं होगी। वे NRDA ऑफिस आ जाएं या फिर किसी सरकारी कार्यालय में बुला लें, हम बातचीत को पहुंच जाएंगे।
आंदोलनकारी किसान पिछले 12 दिनाें से नवा रायपुर विकास प्राधिकरण (NRDA) भवन के सामने तंबू गाड़कर बैठे हैं। उनका भोजन और सोना भी वहीं हो रहा है। अब तय हुआ है कि मांगे पूरी होने तक सभी त्यौहार भी वहीं मनाए जाएंगे। शुक्रवार को वहां मकर संक्रांति मनाने की तैयारी है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे रूपन चंद्राकर ने बताया, वे लोग गणतंत्र दिवस पर यहीं ध्वजारोहण भी करेंगे।