यूक्रेन पर आर-पार:

यूक्रेन पर आर-पार:

ब्रिटेन ने दावा किया है कि रूस यूक्रेन में अपनी कठपुतली सरकार बैठाना चाहता है। रूस यहां ऐसा नेता चाहता है जो उसका समर्थन करता हो। इसके लिए रशियन इंटेलिजेंस ऑफिसर्स यूक्रेन के पूर्व राजनेताओं के संपर्क में है। हालांकि ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया है। उधर, रूस ने ब्रिटेन के इन आरोपों को झूठा करार दिया है।ब्रिटिश मंत्रालय ने शनिवार को कहा, हमें जानकारी मिली है कि रूसी सरकार यूक्रेन के पूर्व सांसद येवेन मुरायेव को रूस समर्थक नेतृत्व के लिए संभावित उम्मीदवार के रूप में देख रही है। ब्रिटिश विदेश सचिव लिज ट्रस ने ट्वीट किया, ‘हम यूक्रेन में रूस समर्थक नेतृत्व स्थापित करने की साजिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘रूस जानता है कि यूक्रेन में सैन्य घुसपैठ एक बड़ी रणनीतिक गलती होगी और उसे कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।’

कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने कहा, ‘हमारा मानना ​​है कि ब्रिटेन की खुफिया जानकारी सही है। रूस की साजिश चिंताजनक है।’ वहीं यूएस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की प्रवक्ता एमिली हॉर्न ने अपने बयान में कहा, ‘इस तरह की साजिश चिंताजनक है। यूक्रेनी लोगों को अपना भविष्य निर्धारित करने का अधिकार है और हम यूक्रेन में लोकतांत्रिक रूप से चुने गए लीडर्स के साथ खड़े हैं।’ ब्रिटेन ने यूक्रेन के चार अन्य लोगों का भी नाम लिया है जो रशियन इंटेलिजेंस ऑफिसर्स के संपर्क में हैं। इसमें ऐसे रशियन इंटेलिजेंस ऑफिसर्स भी शामिल हैं जो यूक्रेन पर हमले का प्लान बना रहे हैं। पांच यूक्रेनियन में से चार 2014 में यूक्रेन से रूस भाग गए थे।

उधर, अमेरिकी हथियारों की पहली खेप यूक्रेन पहुंच गई है। अमेरिकी दूतावास ने बताया कि यूक्रेन के लिए अमेरिका के 200 मिलियन डॉलर के सुरक्षा सहायता पैकेज की पहली खेप कीव में पहुंच गई है। इस हफ्ते अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कीव की यात्रा की थी जिसके बाद ये डिलीवरी हुई है। वॉशिंगटन ने दिसंबर में इस पैकेज को मंजूरी दी थी। दूतावास ने कहा, ‘यूक्रेन की संप्रभुता और रूसी आक्रमण के खिलाफ रक्षा के लिए चल रहे प्रयासों में यूक्रेन का समर्थन करने के लिए अमेरिका इस तरह की सहायता प्रदान करना जारी रखेगा।रूसी विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन के आरोपों का खंडन किया है। मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा, ‘ब्रिटिश विदेश मंत्रालय का दुष्प्रचार इस बात का एक और सबूत है कि एंग्लो सैक्सन के नेतृत्व वाले नाटो देश यूक्रेन के आसपास तनाव बढ़ा रहे हैं। वहीं मुरायेव ने इन आरोपों पर ब्रिटेन के ऑब्जर्वर अखबार को बताया, ‘यह बहुत तार्किक नहीं है। मुझे रूस से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इतना ही नहीं बल्कि वहां मौजूद मेरे पिता की फर्म से पैसा भी जब्त कर लिया गया है।’

हालांकि ऐसा कहा जाता है कि 45 वर्षीय मुरायेव रूस समर्थक राजनेता हैं जो यूक्रेन के पश्चिमी ताकतों के साथ गठबंधन का विरोध करते हैं। दिसंबर 2021 में आयोजित रज़ुमकोव के सेंटर थिंक टैंक के एक सर्वे के अनुसार, वह 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए 6.3% समर्थन के साथ उम्मीदवारों में सातवें स्थान पर थे। मुरायेव नाशी नाम की एक पॉलिटिकल पार्टी के हेड हैं। हाल ही में एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने राजधानी कीव में वर्तमान सरकार पर अमेरिका को देश बेचने का आरोप लगाया था।यह पहली बार नहीं है, जब क्रेमलिन ने रूसी समर्थक नेता को स्थापित करने या यूक्रेन की सरकार में हस्तक्षेप करने की कोशिश की है। रूस ने 2004 में भी यहां राष्ट्रपति चुनाव को धोखाधड़ी से प्रभावित करने की करने की कोशिश की थी। इसके खिलाफ ऑरेंज क्रांति की गई थी जिसके बाद क्रेमलिन के पसंदीदा उम्मीदवार यानुकोविच की हार हुई। 2013 में भी यानुकोविच के खिलाफ लोग सड़क पर उतर आए थे।

यूक्रेन जंग के मुहाने पर है। रूसी सेनाएं उसकी सीमा से महज 20 किलोमीटर दूर हमले के लिए तैयार नजर आती हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी नाटो देश इस जंग को टालने के लिए भरपूर कोशिश कर रहे हैं। शुक्रवार को जिनेवा में रूस और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की बैठक पर नजरें टिकी थीं। ये मीटिंग हुई और नतीजा उम्मीदभरा रहा। मीटिंग के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा- हमने रूस को एक लिखित दस्तावेज दिया है। वो इस पर विचार करेगा और इसके बाद हम फिर बातचीत करेंगे।

वहीं, डर इस बात का है कि अगर रूस किसी वक्त यूक्रेन पर हमला करता है तो यह जंग रूस बनाम पश्चिम हो सकती है। जंग की आशंका देखते हुए ब्रिटेन ने यूक्रेन को एंटी टैंक वेपन्स दे दिए हैं तो कनाडा ने अपनी पैरा ट्रूपर रेजिमेंट यूक्रेन भेज दी है।

1991 में सोवियत संघ टूटा और 15 देशों में बंट गया। रूस के बाद यूक्रेन ही ऐसा हिस्सा था, जिसकी आबादी और क्षेत्रफल सबसे ज्यादा थे। पुतिन उस दौर को भूले नहीं हैं और उन्हें इस बात का दर्द है कि यूक्रेन आज रूस का हिस्सा क्यों नहीं है। दोनों देशों के बीच 1200 मील लंबा बॉर्डर है। कल्चर भी बिल्कुल एक जैसा है।

पुतिन का दर्द ये भी है कि यूक्रेन का झुकाव रूस के बजाय अमेरिका और यूरोप की तरफ क्यों है। वे इसे सैन्य मदद भी देते हैं और अब पुतिन को सबसे बड़ा खतरा यह लग रहा है कि यूक्रेन जल्द ही नाटो में शामिल हो जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका और नाटो सेनाएं किसी भी दिन रूस की सरहद पर खड़ी नजर आएंगीं। पुतिन नाटो और अमेरिका से लिखित में चाहते हैं कि यूक्रेन को कभी नाटो में शामिल नहीं किया जाएगा। उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के जुबानी वादे पर यकीन नहीं है।

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