अहमदाबाद 2008 सीरियल बम ब्लास्ट मामले में शुक्रवार को गुजरात की विशेष अदालत 49 दोषियों को सजा सुनाएगी। कोर्ट ने मंगलवार को सभी को जिहादी साजिश और आतंकवाद के मामलों में दोषी माना है। सभी को IPC की धारा 302 और 120 के तहत सजा सुनाई जाएगी। 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में 70 मिनट के दौरान 21 बम धमाके हुए थे, जिसमें 56 लोगों की जान चली गई थी।
अदालत ने इस मामले की सुनवाई पिछले साल सितंबर में पूरी कर ली थी। दिसंबर 2009 में शुरू हुए इस मुकदमे में 1,100 लोगों की गवाही हुई। सबूत नहीं मिलने की वजह से 28 लोगों को बरी कर दिया गया। सरकारी वकीलों में एचएम ध्रुव, सुधीर ब्रह्मभट्ट, अमित पटेल और मितेश अमीन ने दलीलें दीं, जबकि बचाव पक्ष से एमएम शेख और खालिद शेख आदि ने दलील दीं।
अहमदाबाद विस्फोट के बाद करीब 12 साल तक इस मामले की जांच और सुनवाई चली है। लॉकडाउन के दौरान भी इस मामले की सुनवाई लगातार चलती रही। देश में पहली बार एकसाथ 49 आरोपियों को आतंकवाद के गुनाह में दोषी ठहराया गया है। मामले की पूरी सुनवाई में अब तक सात जज बदल गए।
जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया था कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (IM) और बैन किए गए स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) से जुड़े लोगों ने ब्लास्ट कराए थे। पुलिस का मानना था कि IM के आतंकियों ने 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के जवाब में ये धमाके किए। इस मामले के एक अन्य आरोपी यासिन भटकल पर पुलिस नए सिरे से केस चलाने की तैयारी में है।