राज्य सरकार ने नवा रायपुर में 43 दिन से धरने पर बैठे किसानों से बातचीत फिर शुरू की है। मंत्रिमंडलीय उप समिति ने सोमवार शाम किसान प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया है। यह बैठक मंत्रालय स्थित कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे के कमरे में होगी। इससे पहले मंत्रियों और अफसरों ने आपस में चर्चा के बाद बातचीत के बिंदु तय किए।
मंत्रियाें-अफसरों की बैठक खत्म होने के बाद उप समिति के अध्यक्ष रविंद्र चौबे ने कहा, हम लोगों का किसानों से निरंतर संपर्क है। राहुल जी के आने से पहले भी हम लोगों ने बैठक लेकर उनकी मांगों को सुना था। मुख्यमंत्री जी ने उस दिन हवाई अड्डे पर किसानों के बड़े प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की थी। मुख्यमंत्री जी ने हम लोगों को निर्देश दिया था कि जिन बिंदुओं पर सहमति बन सकती है उसपर बैठकर निर्णय लिया जाए। आज फिर कैबिनेट सब कमेटी की बैठक थी। विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा कर किन विषयों पर सहमति बन सकती है और हम लोग कितना आगे बढ़ सकते हैं उसपर फैसला करने की कोशिश की। अब सहमति के बिंदुओं पर किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठकर बात करेंगे। भविष्य में उनके जो भी विषय होंगे उसपर विचार होगा। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नई राजधानी प्रभावित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष रूपन चंद्राकर ने बताया, बैठक के लिए सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंत्रालय पहुंच गया है। मंत्रियाें के साथ उनकी बातचीत थोड़ी देर में शुरू होगी। मंत्रियों का यह समूह 15 दिन पहले भी किसान प्रतिनिधियों से चर्चा कर चुका है। उसमें केवल आबादी के सर्वे पर सहमति बन पाई। यह सर्वे भी तीन दिन पहले शुरू हुआ है।
नवा रायपुर के आंदोलनकारी किसानों ने सरकार पर उनकी मांगों की अनदेखी का आरोप लगाया है। कल आंदोलन की सभा में एक प्रस्ताव आया। इसमें कहा गया कि उनका एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करेगा। वहां प्रेस क्लब में भी अपनी बात रखने पर सहमति बनी।
राहुल गांधी 3 फरवरी को रायपुर आए थे। आंदोलनकारी किसान उनसे मिलकर बात रखने पर अड़ गए। सरकार ने अनदेखी की तो 20-25 हजार किसान नवा रायपुर की सड़कों से होकर हवाई अड्डे तक पहुंच गए। इस दौरान पुलिस ने लाठी भी चलाई। पथराव भी हुआ। राहुल गांधी के जाने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों के 11 प्रतिनिधियों को बुलाकर उनकी बात सुनी।