किसी जांच के नाम पर रिटायरमेंट राशि रोकना गलत:

किसी जांच के नाम पर रिटायरमेंट राशि रोकना गलत:

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ सिर्फ गैरविभागीय जांच लंबित होने के कारण उनके रिटायरमेंट की देयक राशि को रोकना गलत है। इस महत्वपूर्ण फैसले के साथ ही हाईकोर्ट ने रिटायर्ड सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी को पेंशन और सभी देयक राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।

रविशंकर गुप्ता कवर्धा में सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। अपनी सेवा अवधि की आयु सीमा पूर्ण करने पर उन्हें जून 2019 में सेवानिवृत्ति दी गई। लेकिन, रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें ग्रेच्युटी सहित अन्य राशि का भुगतान नहीं किया गया। इस पर उन्होंने विभाग से जानकारी ली, तब बताया गया कि उनके खिलाफ गैर विभागीय जांच चल रही है। इसके चलते उनकी राशि रोकी गई है। विभाग की ओर से बिना वजह देयक राशि नहीं देने पर उन्होंने अधिवक्ता सुशोभित सिंह और चन्द्र कुमार के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।याचिका में बताया गया कि शासन के नियम के अनुसार यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है और संबंधित कर्मचारी को चार्जशीट दिया गया है, तभी ग्रेच्यूटी और पेंशन राशि रोकी जा सकती है। लेकिन, याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई विभागीय जांच लंबित नहीं है और न ही उन्हें चार्जशीट दिया गया है।इस मामले में राज्य शासन ने जवाब में बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ गैर विभागीय जांच लंबित है। इसलिए ग्रेच्युटी भुगतान और पूर्ण पेंशन की राशि का भुगतान लंबित है। जस्टिस संजय के अग्रवाल की बेंचन ने शासन के जवाब पर असंतुष्टि जाहिर की है। साथ ही उन्होंने आदेशित किया है कि केवल गैर विभागीय जांच लंबित होने मात्र से ही कर्मचारी को सेवानिवत्ति लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को ग्रेच्युटी की संपूर्ण राशि और पूर्ण पेंशन भुगतान करने का आदेश दिया है।

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