रूस और यूक्रेन की जंग से यूक्रेन की हालत काफी खराब है। दिन पर दिन वहां की स्थिति बिगड़ती जा रही है। वहां फंसे भारतीय स्टूडेंट्स काफी बुरे दौर से गुजर रहे हैं। इस बीच यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रही स्टूडेंट शम्शी फिरदौस रविवार को अपने घर भिलाई पहुंची।
उसने बताया कि वह तो सुरक्षित वापस आ गई है, लेकिन अभी भी उनके दोस्त वहां पर फंसे हुए हैं। उनकी हालत ऐसी है कि उनके पास खाने और पीने की सामग्री और पैसे भी नहीं है। एक खाने की थाली को कई लोगों शेयर करके खा रहे हैं। यदि उनको जल्द वहां से नहीं निकाला गया तो उनकी हालत और खराब हो जाएगी।शम्शी ने बताया कि वह ओजोन नेशनल यूनिवर्सिटी यूक्रेन में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। उनका क्षेत्र यूक्रेन का वेस्ट भाग है। वहां अभी स्थिति सामान्य है। ईस्ट जोन की हालत सबसे ज्यादा खराब है। खारकीव और कीव पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। मैं तो किसी तरह वहां से सुरक्षित निकल गई, लेकिन मेरे दोस्त अभी भी वहां फंसे हुए हैं। हमारी यूनिवर्सिटी के लोगों ने काफी मदद की और सभी स्टूडेंट्स को वहां से बाहर निकालने में मदद की।
शम्शी ने बताया कि मेरी एक दोस्त अदिति जो की भिलाई की है। वह अभी कीव में फंसी हुई है। उसकी हालत काफी खराब है। उससे फोन पर बात हुई तो उसने बताया कि वहां सभी बच्चों को बंकर में रखा गया है। खाना उनके पास नहीं है। एक प्लेट में 10-12 लोग खा रहे हैं। एक एप्पल को बांटकर खा रहे हैं। उन्हें पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा है। जहां पर वह हैं। वहां से कुछ ही दूरी पर बम ब्लास्ट हो रहे हैं। इससे वह लोग दहशत हैं।
शम्शी ने बताया भारत सरकार एक ही फ्लाइट भेज रही है, जबकि वहां फंसे बच्चों की संख्या हजारों में है। वहां बच्चों को बॉर्डर पार नहीं करने दे रहे हैं। यूक्रेनियन सैनिक इंडियन को होस्टेज बना रहे हैं। अभी सबसे सुरक्षित जगह जहोनी बचा है। वहां से भी कितने बच्चे बॉर्डर पार कर पाएंगे कुछ कह नहीं सकते। पोलैंड और रोमानिया वाले बॉर्डर पार करने नहीं दे रहे हैं।