यूक्रेन-पोलैंड के दूतावासों से निराश लौट रहे छात्रों के परिजन

यूक्रेन-पोलैंड के दूतावासों से निराश लौट रहे छात्रों के परिजन

शिक्षा और विज्ञान मंत्रालय की मानें, तो भारत के 18,095 भारतीय स्टूडेंट्स यूक्रेन में फंसे हुए हैं। भारत सरकार ‘ऑपरेशन गंगा’ के तहत 1,800 स्टूडेंट्स की वतन वापसी करा चुकी है। हालांकि, भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला का कहना है कि भारत ने यूक्रेन से अपने करीब दो हजार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। उत्तर प्रदेश की बात करें, तो सरकार के पास यूक्रेन में फंसे 1,173 छात्रों का रिकॉर्ड है, जिसमें से सिर्फ 33 छात्र ही भारत लौट पाए हैं।

कई-कई दिनों से भूखे-प्यासे उत्तर प्रदेश के हजारों स्टूडेंट्स अभी यूक्रेन में ही फंसे हुए हैं। सिर पर मौत मंडरा रही है। यूक्रेन से लगातार वीडियो जारी करके भारतीय छात्र यह बता भी रहे हैं। इधर, उनके परिजन भी बेहाल हैं। छात्रों, उनके परिवारों और सरकार में कोई कम्युनिकेशन गैप न रहे, इसके लिए भारत सरकार ने कई हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। दिल्ली में यूक्रेन, पोलैंड समेत अन्य दूतावासों को अलर्ट कर दिया गया है।

28 फरवरी की शाम साढ़े पांच बजे हम दिल्ली में पोलैंड दूतावास पर पहुंचे। गेट बंद मिला। यहां बाहर केबिन में मौजूद गेट इंचार्ज ने बताया कि शाम साढ़े चार बजे दूतावास में काम बंद हो जाता है। हमने कहा कि बॉर्डर पर एक स्टूडेंट फंसा हुआ है, जो पोलैंड के रास्ते भारत आ रहा है, उसके बारे में जानकारी करनी है। गेट इंचार्ज का जवाब था– आप कल आइए, अभी यहां कुछ पता नहीं चलेगा।

यूक्रेन दूतावास पहुंचते-पहुंचते हमें साढ़े छह बज गए। दिल्ली के चाणक्यपुरी में यूक्रेन समेत करीब 10 दूतावास एक ही लेन में हैं। इस लेन में घुसने के लिए चार तरफ से दरवाजे हैं। चारों दरवाजे बंद थे। एक दरवाजे पर मौजूद सिक्योरिटी गार्ड ने बताया कि दूतावास शाम 6 बजे बंद हो जाता है। मतलब, आप चाहें कितनी भी मुसीबत में हों, यहां आप 6 बजे के बाद दूतावास के किसी भी अधिकारी से बात नहीं कर सकते।

विदेश मंत्रालय की भी यही स्थिति देखने को मिली। यहां हमने एक स्टूडेंट के बारे में पूछने के लिए कॉन्टैक्ट किया, लेकिन रिसेप्शन पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला और मंगलवार को आने के लिए कहा गया। कुल मिलाकर इस पड़ताल में कहीं भी ऐसा देखने को नहीं मिला, जैसा 24 घंटे अलर्ट रहने का दावा किया जा रहा है।

दिल्ली में यूक्रेन दूतावास के बाहर यूक्रेन के लोग अपने बच्चों के खिलौने टांग आए हैं। उन्होंने इस दीवार पर एक खत भी लगाया है। इसमें लिखा है- रूस मेरे देश से निकल जाओ। इन लोगों ने दूतावास के बाहर दीप जलाकर शांति की कामना भी की। यहां पर बिहार के विधायक मिन्नत रहमानी मौजूद मिले। वे यूक्रेन में फंसे बिहार के छात्रों की मदद के लिए यहां पर आए थे। उन्होंने बताया, यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की सूची दूतावास अफसरों को सौंप दी है, पर वे कब तक लौटेंगे, इस बारे में संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

विदेश मंत्रालय के बाहर एनएसयूआई कार्यकर्ता प्रदर्शन करते मिले। इनमें से एक आकाश ने बताया कि कई छात्रों के परिजनों ने उनसे संपर्क किया है। वे बेहद परेशान हैं। दिल्ली में कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। उधर, मंगलवार सुबह से यूक्रेन दूतावास पर छात्रों के परिवारजनों का पहुंचना शुरू हो गया है। दिल्ली के लक्ष्मीनगर से आईं सुधा का कहना है कि बच्चों की सकुशल वापसी तक वे यहां से नहीं जाएंगी।

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