ब्रोकरेज हाउस का अनुमान:पेट्रोल की कीमत 121 रुपए लीटर हो सकती है

ब्रोकरेज हाउस का अनुमान:पेट्रोल की कीमत 121 रुपए लीटर हो सकती है

कच्चे तेल की कीमतें गुरुवार को 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। पिछले 9 सालों में यह पहली बार हुआ है। इस आधार पर 7 मार्च के बाद ईंधन की कीमतों में तेल कंपनियों को प्रति लीटर 12 रुपए बढ़ाने की जरूरत होगी। इससे पेट्रोल 121 रुपए लीटर हो सकता है।रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई की वजह से कच्चे तेल की कीमतें रोज बढ़ रही हैं। गुरुवार के बाद शुक्रवार को थोड़ी गिरावट आई और यह 111 डॉलर प्रति बैरल पर रही। उधर, देश में पांच राज्यों के चुनावी माहौल के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं। लेकिन जैसे ही 7 मार्च को चुनाव खत्म होगा, तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी।

तेल कंपनियों को कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त के आधार पर कम से कम 12 रुपए लीटर भाव बढ़ाना होगा। अगर ऐसा होता है तो फिर पेट्रोल 121 रुपए और डीजल 110 रुपए लीटर के पार कुछ राज्यों में पहुंच जाएगा। भारत में ईंधन की कीमत अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर रोजाना सुबह तय होती हैं।पिछले दो महीने से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। ICICI सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 16 मार्च से पहले तेल कंपनियों को 12.1 रुपए प्रति लीटर भाव बढ़ाना होगा, तब जाकर वे अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर पहुंचेंगी। हालांकि इसमें 15 रुपए तक की बढ़त की जा सकती है।इसी तरह से चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 101.4 रुपए और कोलकाता में 10.46 रुपए थी। डीजल की बात करें तो मुंबई में 94.14, दिल्ली में 86.67, चेन्नई में 91.43 और कोलकाता में 89.79 रुपए प्रति लीटर थीं। जेपी मोर्गन ने कहा कि अगले हफ्ते विधानसभा चुनाव खत्म होते ही हम ईंधन की कीमतों में फिर से तेजी देख सकते हैँ।

भारत रूस से 2021 में 43,400 बैरल प्रति दिन तेल का आयात (इंपोर्ट) करता था। यानी कुल इंपोर्ट में इसका हिस्सा केवल 1% था। कोल इंपोर्ट रूस से 1.8 मिलियन टन 2021 में था जो कुल इंपोर्ट का 1.3% था। भारत अपनी जरूरत का करीबन 85% तेल इंपोर्ट करता है और पिछले 120 दिनों से इसकी घरेलू कीमतों में कोई बढ़त नहीं की गई है।

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