देश के सबसे छोटे राज्य गोवा में BJP लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। यहां 40 सीटों में से उसे 20 पर जीत हासिल हुई। उसे 3 निर्दलियों और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (MGP) के 2 विधायकों ने समर्थन दे दिया है। इस तरह उसका आंकड़ा 25 हो गया है जो बहुमत से 4 ज्यादा है। कांग्रेस 11 सीटें ही जीत पाई।
आम आदमी पार्टी (AAP) को पहली बार विधानसभा में एंट्री मिली है। उसके दो उम्मीदवार जीते हैं, लेकिन पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने जिस अमित पालेकर को CM का चेहरा बनाया था, वे ही चुनाव हार गए। उधर, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) खाता भी नहीं खोल पाई।गोवा में पिछली बार त्रिशंकु विधानसभा थी। कांग्रेस को 17 और भाजपा को 13 सीटें मिली थीं। लगभग तय था कि कांग्रेस निर्दलियों की मदद से सरकार बना लेगी, लेकिन भाजपा ने पहले दावा कर दिया और सत्ता हथियाने में कामयाब हो गई। इस बार 301 उम्मीदवारों ने यहां चुनाव लड़ा। इनमें BJP के 40, कांग्रेस के 37, AAP के 39, TMC के 26, MGP के 13 और निर्दलीय 68 कैंडिडेट्स थे। 11.56 लाख वोटर्स ने इनकी हार-जीत का फैसला किया।पणजी सीट से BJP के दिवंगत नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर मैदान में थे। बीजेपी ने टिकट नहीं दिया तो वे निर्दलीय ही मैदान में उतर गए। उनके सामने BJP के अतानासियो मोनसेराटे और कांग्रेस के एल्विस गोम्स थे। उत्पल की वजह से ही अब यह मुकाबला त्रिकोणीय हो गया, लेकिन मोनसेराटे ने उन्हें 710 वोटों से हरा दिया।
7 मार्च को 6 अलग-अलग एग्जिट पोल में लगभग एक जैसा ट्रेंड दिखा था। दो सर्वे में BJP को अधिकतम 18 सीटें मिलने का अनुमान था और एक सर्वे में कांग्रेस को 20 सीटों तक पहुंचा दिया था। नतीजे इससे उलट रहे। बीजेपी 20 सीटें जीत गई, जबकि कांग्रेस का 11 पर ही ब्रेक लग गया।
गोवा में पिछली बार कांग्रेस 17 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन 13 सीटें हासिल करने वाली BJP ने कुछ निर्दलीय विधायकों और क्षेत्रीय दलों से गठबंधन करके सरकार बना ली थी। इस बार कांग्रेस ने गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) के साथ, TMC ने महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (MGP) के साथ और NCP ने शिवसेना के साथ चुनाव लड़ा।