कलकत्ता हाईकोर्ट ने बीरभूम हत्याकांड में ममता सरकार को बड़ा झटका देते हुए CBI जांच का आदेश जारी कर किया। आदेश के साथ ही CBI की टीम ने रामपुरहाट पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। टीम को 7 अप्रैल तक कोर्ट में रिपोर्ट पेश करनी है। इससे पहले SIT इस मामले की जांच कर रही थी। फोरेंसिक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि लोगों को जिंदा जलाने से पहले बुरी तरह पीटा और धारदार हथियारों से मारा गया था।
चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की बेंच ने बंगाल सरकार को मामले की जांच सीबीआई को सौंपने और SIT को आगे की जांच में सीबीआई को पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया है।बीरभूम में जिन 10 लोगों को बेरहमी से हत्या की गई, उन्हें मारने से से पहले बुरी तरह पीटा गया था। फोरेंसिक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। जांच टीम को जले हुए घरों में खून के धब्बे मिले हैं, जिससे पता चला है कि कि उन पर धारदार हथियार से हमला भी किया गया था। संकेत यह भी मिले हैं कि भीड़ ने लोगों को बेहोश होने तक पीटा और फिर उन्हें घर में बंद कर जिंदा जला दिया। घरों में आग लगाने के लिए पेट्रोल बम फेंके गए थे।
बीरभूम हिंसा मामले में केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग वाली याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट आज फैसला सुनाएगा। फिलहाल इस मामले की जांच SIT कर रही है। इधर, बीरभूम हिंसा का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने याचिका दायर कर मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है। विष्णु ने कहा कि स्थानीय अधिकारी राज्य की सत्तारूढ़ TMC के चलते इस भयानक वारदात के असली मुजरिमों को बचाने में लगे हैं।
बीरभूम के रामपुरहाट में TMC के भादू शेख की हत्या के बाद यह पूरा मामला शुरू हुआ था। शेख की हत्या के गवाह रहे तृणमूल कार्यकर्ता ललन शेख के मुताबिक, 10-12 बदमाशों का एक गिरोह बाइक पर आया था। उन्होंने बरशाल ग्राम पंचायत के उप प्रमुख पर बम फेंक दिया। उस वक्त वह अपने स्कूटर पर बैठकर फोन पर बात कर रहा था।
इस घटना के कुछ घंटों बाद ही भीड़ बागतुई पहुंची और हत्याकांड को अंजाम दिया। भादू बागतुई पश्चिमपारा का रहने वाला था और उसके हमलावर बागतुई पुरबापारा के थे। भादू के भाई बाबर की भी एक साल पहले हत्या कर दी गई थी।