दो साल बाद रतनपुर में नवरात्र की धूम:

दो साल बाद रतनपुर में नवरात्र की धूम:

चैत्र नवरात्रि इस बार दो अप्रैल से शुरू हो रहा है। बिलासपुर के रतनपुर स्थित प्रसिद्ध महामाया देवी मंदिर में इस बार 18 हजार दीप प्रज्जवलित किए जाएंगे। पूरे नौ दिनों तक यहां शतचंडी यज्ञ के साथ ही जसगीत का आयोजन भी होगा। कोरोना काल के दो साल बाद नवरात्रि पर्व पर भक्त बिना पाबंदी के ज्योति कलश का दर्शन कर सकेंगे। इसके साथ ही सप्तमी पर यहां पदयात्रा भी करेंगे। महामाया देवी मंदिर में नवरात्रि पर्व पर 31 हजार ज्योति कलश प्रज्जवलित करने का विश्व रिकॉर्ड भी है।

नवरात्रि पर्व पर इस बार कोई पाबंदी नहीं रहेगी। यही वजह है कि मंदिरों में देवी आराधना के इस पर्व की जोरों से तैयारी चल रही है। रतनपुर स्थित महामाया देवी मंदिर के साथ ही अन्य देवी मंदिरों में भी नवरात्रि पर्व की तैयारी चल रही है। मंदिरों की साफ-सफाई और रंग-रोगन किया गया है। इसके साथ ही ज्योति कलश के लिए जगह-जगह बुकिंग भी चल रही है। महामाया देवी मंदिर के व्यवस्थापक संतोष शर्मा ने बताया कि इस बार 18 हजार ज्योति कलश प्रज्जवलित किए जाएंगे।

संतोष शर्मा बताते हैं कि दो साल तक देवी मंदिर में नवरात्रि पर विशेष पूजा अर्चना की जा रही थी। इसके साथ ही अन्य अनुष्ठान व आयोजन बंद थे। दो साल बाद अब मंदिर भक्तों से फिर से गुलजार होगा। साल 2019 की तरह महामाया मंदिर परिसर में शतचंडी यज्ञ, सप्तसती पाठ के साथ ही जसगीत का आयोजन होगा। पूरे नौ दिनों तक मंदिर में श्रद्धालु सुबह पांच बजे से रात 12 बजे तक दर्शन कर सकेंगे।महामाया देवी मंदिर में दर्शन करने के लिए महासप्तमी पर हर साल श्रद्धालु पदयात्रा करते हैं। लेकिन, कोरोना काल में पदयात्रा भी बंद कर दिया गया था। दर्शनार्थियों के लिए बार महासप्तमी पर्व खास रहेगा। बीते सालों की तरह यहां मंदिर का पट रात भर खुला रहेगा और भक्त यात्रा कर देवी का दर्शन कर सकेंगे।चैत शुक्ल नवमी रविवार 10 अप्रैल को पुष्य नक्षत्र कर्क राशि के चंद्रमा में रामनवमी मनाई जाएगी। वर्षों बाद इस बार रामनवमी के दिन पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि का संयोग बन रहा है। इससे पहले भारतीय सनातनी नववर्ष 2079 के आरंभ के साथ 2 अप्रैल को चैत्र नवरात्र भी शुरू होगा। ज्योतिषाचार्य पंकज भूषण मिश्रा ने बताया कि चैत्र नवरात्र का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि नए हिन्दू नववर्ष आरंभ के साथ इस नवरात्र में माता दुर्गा एवं सूर्य के साथ भगवान श्रीराम, भगवान श्री विष्णु व हनुमान जी की पूजा का संयोग इसी नवरात्र के बीच बनता है। शास्त्रों में वर्णित है कि चैत्र नवरात्र में भगवान विष्णु के दो अवतार हुए थे। पंचमी तिथि को मत्स्यावतार और नवमी तिथि को राम अवतार लेकर प्रकट हुए थे।

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