प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ोतरी पर ‘कानूनी’ डंडा:सरकार बोली- 8% से ज्यादा नहीं बढ़ा सकते फीस

प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ोतरी पर ‘कानूनी’ डंडा:सरकार बोली- 8% से ज्यादा नहीं बढ़ा सकते फीस

छत्तीसगढ़ के प्राइवेट स्कूलों में शुल्क ढांचे को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने दो साल पहले शुल्क विनियमन अधिनियम बनाया था। प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा और से अधिकतर जिलों में उस पर गंभीरता से अमल तक नहीं हो पाया। नए शिक्षा सत्र के लिए स्कूलों ने मनमानी शुल्क वृद्धि की और शिकायतें बढ़ीं तो स्कूल शिक्षा विभाग को अपना कानून याद आ गया।

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने सभी कलेक्टर को निर्देश जारी किए हैं। अधिनियम की कॉपी के साथ भेजे गए निर्देश पत्र में प्रमुख सचिव ने मनमानी शुल्क पर कड़ाई से रोक लगाने के लिए जिला स्तरीय शुल्क विनियमन समितियों का गठन करने का निर्देश दिया है। साथ ही छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम-2020 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला ने कलेक्टरों से कहा है, वे अपने जिले के सभी निजी स्कूलों के शुल्क के संबंध में जानकारी प्राप्त करके अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत आवश्यक कार्यवाही करें। निजी विद्यालयों में अनियंत्रित तरीके से फीस न बढ़ाई जाए एवं पालकों को कठिनाई का सामना न करना पड़े। कलेक्टरों को संदर्भित पत्रों के साथ अधिनियम तथा अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों की कॉपी भी भेजी गई है।2020 में बने छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम की धारा-10 (8) में कहा गया है, कोई निजी स्कूल एक बार में अधिकतम 8% से अधिक शुल्क नहीं बढ़ा सकती। इसके लिए भी उसे स्कूल स्तरीय शुल्क समिति से अनुमोदन चाहिए होगा। इससे अधिक शुल्क वृद्धि करने के लिए विद्यालय शुल्क समिति को अपना प्रस्ताव जिला स्तरीय शुल्क विनियमन समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।अधिनियम की धारा-13 के तहत विद्यालय शुल्क समिति के विरूद्ध अपील सुनने का अधिकार जिला समिति को है। अधिनियम की धारा-4 के अनुसार जिला फीस समिति के अध्यक्ष जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी सचिव है। निजी स्कूलों द्वारा अनियंत्रित तरीके से बढ़ाई फीस को विनियमित करने के लिए जिला कलेक्टरों को अधिनियम में पर्याप्त अधिकार प्राप्त है।

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