दुनिया के साथ भारत में भी कोरोना के नए मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हेल्थ डिपार्टमेंट के मुताबिक, सोमवार को दिल्ली में कोरोना के 501 केस रजिस्टर किए गए। इसके साथ ही राजधानी में पॉजिटिविटी रेट 7.72% हो गया है। इससे पहले रविवार को 517 नए केस सामने आए थे, उसके दूसरे दिन 500 से ज्यादा केस दर्ज किए गए। वहीं, बीते 24 घंटे में पूरे भारत में कुल 1144 नए केस दर्ज किए गए।
दिल्ली के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी कोरोना के मामलों में बढ़त देखी जा रही है। यूपी के नोएडा (गौतम बुद्ध नगर) में मंगलवार को कोविड-19 के 107 नए मामले सामने आए, इनमें 33 स्कूली छात्र हैं। बीते सोमवार को यहां 19 स्कूली छात्र पॉजिटिव पाए गए थे। जिले में फिलहाल 411 एक्टिव केस हैं। हरियाणा में 234 और यूपी में 115 नए केस दर्ज किए गए।वहीं, आईआईटी कानपुर के दूसरे प्रोफेसर राजेश रंजन ने भी एसआईआर मॉडल के हवाले से दावा किया है कि भारत में आने वाली चौथी लहर दूसरी और तीसरी लहर से कम घातक होगी।इधर, कोरोना की सटीक भविष्यवाणी करने वाले कानपुर IIT प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने दावा किया है कि कोरोना की चौथी लहर आने की संभावना कम है। अग्रवाल ने एक इंटरव्यू में कहा कि कोरोना की चौथी लहर आने की संभावना कम है, क्योंकि अब तक कोई नया म्यूटेंट सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि अब लोगों में इम्युनिटी पावर 90% तक बन गई है, लेकिन अगर लापरवाही बरती तो ये म्यूटेंट फिर से अपना असर दिखा सकते हैं।
भारत में लगातार 11 हफ्तों तक गिरावट के बाद पिछले हफ्ते के बीच कोरोना के मामलों में 35% की बढ़त दर्ज की गई। 11 से 17 अप्रैल के बीच कोरोना के 6,610 मामले रजिस्टर किए गए, जबकि इससे एक हफ्ते पहले 4,900 मामले सामने आए थे।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि कोरोना का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। लोगों को सुरक्षित रहने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने चीन और अमेरिका में बढ़ते कोविड के मामलों के बीच पांच राज्यों के लिए चेतावनी जारी की थी।भारत में तीसरी लहर फरवरी से ही लगातार ढलान पर है और एक्सपर्ट्स का मानना है कि ताजा लहर देश में खत्म हो चुकी है। इसी वजह से भारत में कोविड प्रतिबंधों में ढील दी जा चुकी है और मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर सख्ती न के बराबर है, लेकिन जब चीन समेत कई विकसित देशों में कोरोना वापसी करने लगा है। ऐसे में भारत में भी इसके खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता है।