चीन अब ऑस्ट्रेलिया के करीब पहुंच गया है। दक्षिण प्रशांत महासागर में मौजूद छोटे से देश सोलोमन आईलैंड्स की सरकार से सीक्रेट डील करने के बाद चीनी पुलिस ने वहां की पुलिस को ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। कुछ दिन पहले इस डील का खुलासा हुआ था और सोलोमन आईलैंड्स के हजारों नागरिक चीन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे। हालांकि, इसका कोई असर नहीं हुआ और वहां की सरकार ने चीन के साथ मिलकर काम करने पर सहमति जता दी। माना जा रहा है कि चीन यहां बहुत जल्द मिलिट्री बेस भी शुरू कर सकता है।
चीन और सोलोमन आईलैंड्स के बीच सीक्रेट डील पर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की पैनी नजरे हैं। पिछले दिनों अमेरिकी विदेश विभाग के एक अफसर ने सोलोमन का गुपचुप दौरा किया था। ‘ब्लूमबर्ग’ वेबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी पुलिस अफसर सोलोमन पुलिस को सेल्फ डिफेंस और काउंटर अटैक की ट्रेनिंग दे रहे हैं।
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया को आशंका है कि चीन इस इलाके में मिलिट्री बेस बनाने की तैयारी कर रहा है ताकि यहां से गुजरने वाले दूसरे देशों के शिपमेंट्स से टैक्स वसूला जा सके। अगर चीन यहां पैर पसार लेता है तो दूसरे देश ड्रैगन के दबाव में आ जाएंगे। चीन और सोलोमन आईलैंड्स की सरकारों के बीच अप्रैल में यह डील साइन हुई थी। अब भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान का संगठन क्वॉड भी चीन के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है।सोलोमन द्वीप की आबादी 6.87 लाख है। चीन के पास घोषित तौर पर अफ्रीका में एक सैन्य अड्डा जिबूती में है। इसे 2017 में एक नौसैनिक सुविधा के लिए बनाया गया था। चीन का दावा है कि यह सोलोमन द्वीप में शांति और स्थिरता और व्यापार को बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहा है। खास बात ये है कि विदेशी सैन्य अड्डों के मामले में चीन किसी भी नजरिए से अमेरिका के सामने नहीं ठहरता। दुनियाभर में अमेरिका के घोषित तौर पर 450 से ज्यादा मिलिट्री बेस हैं।
जापान ने 2007 में क्वॉड बनाने की पहल की थी। चीन और रूस ने इसका विरोध किया था। 10 साल तक यह आइडिया रुका रहा। 2017 में इसे फिर एक्टिव किया गया। इस ग्रुप का मकसद समुद्र के रास्तों को किसी भी प्रभाव, या कहें चीन के दबाव से मुक्त कराना है। चीन हिंद-प्रशांत के तमाम ट्रेड रूट्स पर कब्जा करने के बाद वहां से निकलने वाले जहाजों से फीस वसूलना चाहता है।