छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण की दर बढ़कर 2.23% हो गई है। पिछले चार महीनों में यह सर्वाधिक है। अभी तक के रुझान से पता चला है कि यह संक्रमण लोगों की यात्राओं में लापरवाही, असावधानी की वजह से फैला है। गर्मी की छुटि्टयों में बड़ी संख्या में लोग दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल और उत्तर के हिल स्टेशनों पर गए। वहां से लौटे तो सर्दी-जुकाम के लक्षणों की अनदेखी की और असावधानी में यह वायरस फिर से फैल रहा है।देश भर में अभी महाराष्ट्र में संक्रमण की दर सबसे हाई है। वहां एक दिन पहले 3600 से अधिक नए मरीज मिले हैं। केरल में भी दो हजार से अधिक केस मिले। दिल्ली में मंगलवार को एक हजार 383 लोगों में कोरोना मिला है। कर्नाटक, तमिलनाडु में भी केस बढ़े हुए हैं। इस लिहाज से ये प्रदेश संक्रमण के सबसे बड़े हॉटस्पाट बने हुए हैं। सार्वजनिक गतिविधियां और पर्यटन अब अबाध है। आने-जाने में कोई जांच आदि भी अनिवार्य नहीं रह गई है।
कोरोना से निपटने की पूरी तैयारी के सरकारी दावे के विपरीत कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग का सिस्टम कमजोर हुआ है। दूसरी लहर तक किसी व्यक्ति के पॉजिटिव आने के तुरंत बाद प्रशासन सक्रिय हो जाता था। मरीज को फोन कर उनके संपर्कों में आए लोगों की जानकारी ली जाती थी। उनके घर और कार्य स्थल पर पहुंचकर संभावित संपर्क में लोगों की जांच की जाती थी। इस बार कई केस में ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है।छत्तीसगढ़ में मंगलवार को केवल तीन हजार 944 कोरोना के संदिग्ध नमूनों की जांच की गई। इसमें 88 नए लोग पॉजिटिव पाए गए। एक दिन पहले यानी सोमवार को 7 हजार 477 नमूनों की जांच के बाद 69 लोग पॉजिटिव मिले थे। यानी कम जांच के बाद भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। अब प्रदेश में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर 516 हो गई है। अब तक 11 लाख 53 हजार 225 लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।