रेलवे प्रशासन द्वारा बापू उप नगर से बेदखल किए गए 254 परिवारों को छह साल बाद भी रहने को मकान नहीं दिया गया। हटाए गए लोग रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण कर बसे हुए थे। रेल प्रशासन ने साल 2016 में इनसे जमीन खाली कराने बलपूर्वक कार्रवाई की।
कार्रवाई का कड़ा विरोध किया गया, परंतु सीआरपी ने उसे सख्ती से शांत करा दिया। कार्रवाई से नाराज लोगों की ओर से भंवर सेन मोगरे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने बेजा कब्जा में बसे लोगों के पुनर्वास के लिए रेल प्रशासन को तो कोई आदेश नहीं दिया पर नगर निगम को आवासीय योजना तैयार करते वक्त इनके लिए व्यवस्था करने के आदेश दिए। नगर निगम प्रशासन ने इस दिशा में आज तक कोई पहल नहीं की।
खबर है कि पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने हाल ही में आयुक्त नगर निगम को पत्र लिख कर प्रभावितों को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराने कहा। उन्होंने कहा कि नगर निगम के अधिकारियों ने प्रभावितों से 21 फरवरी 2020 को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराने के लिए फार्म भरवाए थे, परंतु आज तक उन्हें आवास नहीं दिया गया। उन्होंने मधुबन में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन 452 यूनिट में इन्हें मकान देने कहा है।भंवरसेन मोगरे व 254 अन्य विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिनांक 2 दिसंबर 2019 को पारित आदेश में सभी 254 परिवारों को आवासीय योजनाओं के अंतर्गत मकान उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। प्रभावितों में 80 फीसदी सफाई कामगार परिवार हैं, जो नगर निगम में ठेका श्रमिक के रूप में कार्यरत हैं। इसमें महिला, पुरुष दोनों शामिल हैं। हाईकोर्ट के आदेश का अब तक पालन नहीं हुआ।