छत्तीसगढ़ के बस्तर में माओवादी 28 जुलाई से 5 अगस्त तक चारु मजूमदार की शहादत दिवस और शहीदी सप्ताह मना रहे हैं। माओवादियों के इस सप्ताह की वजह से ईको रेलवे ने 13 जुलाई से ही यात्री ट्रेनों को परिचालन न करने का निर्णय लिया है। किरंदुल से विशाखापट्टनम तक चलने वाली किरंदुल-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस और पैसेंजर यह दोनों ट्रेनें 24 दिनों तक किरंदुल नहीं पहुंचेगी। नक्सल दहशत की वजह से इन दोनों ट्रेनों का अंतिम स्टॉपेज अब जगदलपुर ही होगा। ऐसे में दक्षिण बस्तर के यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए जगदलपुर का सफर करना होगा।
साल 2022 में नक्सल दहशत की वजह से 47 दिन से ज्यादा ट्रेनों के पहिए थमे रहे। इसकी बड़ी वजह यह रही की नक्सली अपने इस सप्ताह के दौरान बड़ी वारदातों को अंजाम देते हैं। किरंदुल-विशाखापट्टनम रेल मार्ग पर दंतेवाड़ा के बासनपुर-झिरका के घने जंगल में माओवादी ज्यादातर रेल पटरियों को उखाड़ ट्रेनों को डिरेल करते हैं। साल 2021 में भी इसी जगह माओवादियों ने एक यात्री ट्रेन को डिरेल किया था। हालांकि, रफ्तार कम होने की वजह से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ था। मालगाड़ियों को भी कई दफा अपना निशाना बना चुके हैं।दरअसल, किरंदुल से विशाखापट्टनम के बीच सिर्फ 2 यात्री ट्रेनें चलती हैं। इनमें से एक दिन में चलने वाली किरंदुल-विशाखापट्टनम पैसेंजर ट्रेन तो वहीं दूसरी नाइट एक्सप्रेस ट्रेन है। इन दोनों ट्रेनों में बस्तर के सैकड़ों लोग सफर करते हैं। यह ट्रेन ओडिशा होते हुए विशाखापट्टनम पहुंचती है। ऐसे में ओडिशा के अरकू की खूबसूरत वादियों का आनंद और विशाखापट्टनम में बीच की सैर करने समेत मेडिकल कामों के लिए जाने वाले लोगों की संख्या अधिक होती है।