छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र:सिंहदेव के इस्तीफे पर विपक्ष का हंगामा, बताया संवैधानिक संकट

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र:सिंहदेव के इस्तीफे पर विपक्ष का हंगामा, बताया संवैधानिक संकट

छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र बुधवार सुबह 11 बजे से शुरू हो गया। शून्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के पंचायत विभाग से इस्तीफे के मुद्दे पर हंगामा हो गया। पूर्व योजना के मुताबिक विपक्ष ने इसपर सवाल उठाए। इसको व्यवस्था का प्रश्न बताकर सरकार से जवाब मांगा गया। हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को पहले 10 मिनट के लिए और बाद में गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया।

शून्यकाल शुरू होते ही भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा, प्रदेश में संविधानिक संकट की स्थिति बन गई है। मंत्री ने पत्र लिखकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सामूहिक उत्तरादायित्व के तहत उन आरोपों पर मुख्यमंत्री और दूसरे मंत्रियों का जवाब आना चाहिए। भाजपा के दूसरे विधायकों ने इस पर सवाल उठाए। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा, एक मंत्री का मुख्यमंत्री को पत्र लिखना संविधानिक संकट और व्यवस्था का प्रश्न नहीं होता। मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करने की भी विधानसभा सचिवालय को कोई सूचना नहीं है।

भाजपा विधायकों ने कहा, मंत्रियों के तय प्रोटोकाल का पालन नहीं हो रहा है। कोरोना काल में फैसलों के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति अभी भी फैसले ले रही है। हंगामा बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सदन की कार्यवाही को 10मिनट के लिए स्थगित कर दिया। कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो भाजपा विधायकों ने मुद्दा फिर से उठाया। इस बार कांग्रेस विधायक भी अपनी सीट पर खड़े हो गए और भाजपा के आरोपों का जवाब देने लगे। हंगामा रुकता न देखकर विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इस हंगामे की वजह से सदन में ध्यानाकर्षण के मुद्दे नहीं उठ पाए।

प्रश्न काल में घरेलू नल कनेक्शन योजना में पिछड़ने का मामला उठा। भाजपा विधायक रंजना डीपेंद्र साहू और अजय चंद्राकर ने यह मामला उठाया। बाद में भाजपा विधायकों ने इस मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री रुद्र कुमार गुरु को घेरा। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा, पैसा आते ही बंदरबाट शुरू हो गई। इसकी वजह से मुख्यमंत्री को टेंडर निरस्त करना पड़ा। 2020 में योजना शुरू हुई और सितम्बर 2023 में पूरा कर लिया जाना है। लक्ष्य तय हुआ है 38 लाख से अधिक घरों तक नल पहुंचाने का। जुलाई 2022 तक केवल 6 लाख लोगों को इसका फायदा दिया गया है। एक साल में 32 लाख कनेक्शन कैसे दिया जाएगा। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा, सरकार राज्यांश का पैसा ही इस योजना के लिए नहीं दे रही है। इसके बाद भाजपा के सभी विधायक खड़े होकर सवाल करने लगे।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री रुद्र कुमार गुरु ने कहा, दो साल कोरोना रहा। केंद्र सरकार ने अपने हिस्से का पैसा नहीं दिया। तीन महीने उसका इंतजार करने के बाद राज्य सरकार ने अपने हिस्से के पैसे से इसे आगे बढ़ाया। इसकी वजह से देर हुई। योजना बनकर तैयार है। इस टेंडर लगना शुरू हो चुका है। समय-सीमा के भीतर हम काम पूरा करने का भरोसा दिलाते हैं। भाजपा विधायकों का हमला जारी रहा। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, इस योजना की प्रगति में छत्तीसगढ़ 30वें नंबर पर है। यह शर्मनाक स्थिति है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने विधानसभा की समिति से जांच कराने की मांग की। इससे पहले कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने पर्यावरण नियमों की अनदेखी और मोटर पंपों को स्थायी बिजली कनेक्शन का मामला उठाया।स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से इस्तीफे की चिट्‌ठी के बाद इस सत्र में भारी हंगामे के आसार बन रहे हैं। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने का मौका नहीं छोड़ना चाहता। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा, इस सत्र में प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्री के इस्तीफे के बाद जो संवैधानिक संकट की स्थिति निर्मित हुई है उस पर भी हम जवाब चाहेंगे। कौशिक ने कहा, ऐसे कई मुद्दे हैं जिन्हें लेकर विपक्ष मुखरता से सरकार को घेरेगा। प्रदेश में कानून व्यवस्था बदहाल है। अनाचार, हत्या, लूट, अपहरण, जैसी अपराधिक घटनाएं लगातार घटित हो रही हैं। प्रदेश की कांग्रेस सरकार इस पर अंकुश लगाने में असफल है। किसानों के सामने खाद, बीज का संकट है। इन मुद्दों पर हम सरकार से जवाब चाहेंगे।

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