राष्ट्रपति भवन में आज नीति आयोग की 7वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। इसमें सभी राज्यों के सीएम, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, नीति आयोग के फुल टाइम मेंबर्स और केंद्रीय मंत्री विशेष आमंत्रित के रूप में भाग ले रहे हैं। हालांकि, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने बैठक का बहिष्कार किया है। साथ ही बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी स्वास्थ्य कारणों के चलते बैठक में नहीं पहुंचे हैं।
जुलाई 2019 के बाद से गवर्निंग काउंसिल की यह पहली व्यक्तिगत बैठक है। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच एक नई दिशा में काम करने के लिए तालमेल बैठाने को लेकर रणनीति बनाई जाएगी। बैठक के एजेंडे में फसल विविधीकरण और तिलहन- दालों और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना शामिल है। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-स्कूली शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-उच्च शिक्षा का कार्यान्वयन और शहरी शासन समेत अन्य मुद्दे शामिल हैं।
सरकार की ओर से एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जैसा कि भारत आजादी के 75 साल मना रहा है, राज्यों के लिए यह समय की जरूरत है कि वे चुस्त और आत्मनिर्भर हों और सहकारी संघवाद की भावना से ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर बढ़ें। बता दें कि नीति आयोग की शीर्ष संस्था परिषद में सभी मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नर और कई केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। प्रधानमंत्री नीति आयोग के अध्यक्ष हैं।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने शनिवार को पीएम को पत्र लिखकर कहा कि वह राज्यों के प्रति केंद्र के वर्तमान “भेदभावपूर्ण” रवैये के विरोध में बैठक का बहिष्कार करेंगे। भारत एक मजबूत राष्ट्र के रूप में तभी विकसित हो सकता है जब राज्यों का विकास हो। मजबूत और आर्थिक रूप से जीवंत राज्य ही भारत को एक मजबूत देश बना सकते हैं।
नीति आयोग ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के गवर्निंग काउंसिल की बैठक का बहिष्कार करने के फैसले को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया है। आयोग ने राव के लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की सात अगस्त को होने वाली संचालन परिषद की बैठक में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है।