छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में आजादी की गौरव यात्रा के नाम से पदयात्रा मंगलवार से शुरू कर दी है। विभिन्न क्षेत्रों में विधायकों, पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके पार्टी प्रत्याशियों और पदाधिकारियों को यात्रा का जिम्मा दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव उत्तर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर विधानसभा में तिरंगा लेकर सूखे के संकट से जूझ रहे खेतों में पहुंचे। वहीं सुदूर दक्षिण में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने बरसते पानी के बीच कोंडागांव के जंगलों से होकर पदयात्रा निकाली।
स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने आजादी की गौरव पदयात्रा की शुरुआत उदयपुर ब्लाक के देवगढ़ से की। भारी जनसमूह के साथ हाथों में तिरंगा लिए, महात्मा गांधी की जय, जवाहरलाल नेहरु की जय, अमर शहीदों की जय का नारा लगाते हुए यह पदयात्रा देवगढ़- मंदिर से भदवाही, खमरीया, रीखी, सलका, पलका, सोनतराई, मिरगाडाड़ होते हुए 22 किलोमीटर की दूरी तय करके उदयपुर पहुंचनी है। पदयात्रा के दौरान सिंहदेव ग्रामीणों से बातचीत करते हुए आगे बढ़े। उन्होंने सूखा प्रभावित खेतों में जाकर वहां के हालात देखे, किसानों से चर्चा कर मदद का भरोसा दिलाया।
उधर कोण्डागांव के विधायक और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने स्थानीय शीतला माता मंदिर में पूजा अर्चना कर आजादी की गौरव यात्रा की शुरुआत की। हाथों में तिरंगा लिए सैकड़ों पदयात्री मुख्य मार्ग से संबलपुर के लिए रवाना हुए। वहां एक जनसभा में मोहन मरकाम ने आजादी के आंदोलन में कांग्रेस और आदिवासी समाज की भूमिका पर अपनी बात रखी। यह यात्रा बनियागांव तक गई। बुधवार को यह पदयात्रा बनियागांव से शुरू आगे बढ़कर बड़े कनेरा तक जाएगी। गुरुवार को बड़े कनेरा से मुलमुला तक की यात्रा होगी और शुक्रवार को मुलमुला से करमारी तक पदयात्री जाएंगे। यात्रा का समापन 13 अगस्त को शामपुर गांव में एक जनसभा के साथ होगा।रायपुर पश्चिम से कांग्रेस के अलग-अलग ब्लॉक अध्यक्षों, शहर कांग्रेस अध्यक्ष आदि की अगुवाई में प्रभात फेरी निकाली गई। प्रभातफेरी की शुरुआत संत रविदास वार्ड से हुई। स्थानीय विधायक विकास उपाध्याय ने वहां प्रत्येक दिन प्रभात फेरी निकालने की योजना बनाई है। रायपुर की दक्षिण विधानसभा में नगर निगम सभापति प्रमोद दुबे की अगुवाई में प्रभात फेरी निकाली गई। उत्तर में कुलदीप जुनेजा ने पदयात्रा निकाली। कांग्रेस की योजना में यह पदयात्रा 75 किमी की होनी है। शहरी विधानसभा क्षेत्रों में ऐसा कोई रूट चार्ट ही नहीं बन पा रहा है जिसमें 75 किमी की पदयात्रा हो पाए।