यूरोप महंगाई से जूझ रहा है। यहां महंगाई की दर पिछले 11 साल के रिकॉर्ड 8.9% के स्तर पर है। यूरोजोन में शामिल इन देशों के आंकड़ों में 19 देशों में ये हालात हैं। बाकी देशों में महंगाई की दर और भी ज्यादा है। पूर्वी यूरोप के देश एस्टोनिया में सबसे ज्यादा 23% महंगाई दर है। मिडिल क्लास में सरकारों के प्रति गुस्सा बना हुआ है। कई जगहों पर लोगों ने सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन भी किया है। इससे सरकारें घबराई हुई हैं। ब्रिटेन में प्रधानमंत्री पद के चुनावों में महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
साथ ही फ्रांस में भी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को भी लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिमी यूरोप के अपेक्षाकृत धनी देश जैसे जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड्स, स्पेन और इटली की सरकारों ने महंगाई पर काबू पाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें लोगों को रोजमर्रा की कई चीजों को काफी कम दामों पर उपलब्ध कराने के लिए स्टोर्स खोले गए हैं। इन स्टोर्स पर भीड़ देखी जा सकती है।पोलैंड में महंगाई की दर पिछले दो दशकों के दौरान रिकॉर्ड 18% हो गई है। पोलैंड में सबसे ज्यादा 3 लाख से ज्यादा यूक्रेनी शरणार्थी आए हैं। इन लोगों ने राजधानी वॉरसा में पनाह ली हुई है। दूसरे बड़े शहर रेजेजॉव में लगभग एक लाख यूक्रेनी शरणार्थियों के आने से यहां अब स्थानीय लोगों ने विरोध भी शुरू कर दिया है। हाल ही में उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया। दक्षिण पंथी पोलिश पार्टी के इन समथर्कों का मानना है कि यूक्रेनी शरणार्थियों के कारण पोलैंड में महंगाई की दर बेतहाशा बढ़ रही है।यूरोपीय कमीशन ने अगस्त में जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि यूरोप में 30 साल तक की उम्र के 58% युवाओं में बढ़ती महंगाई और रोजगार के अवसरों में कमी से असंतोष बढ़ रहा है। पूर्वी यूरोप के कम विकसित देशों के साथ-साथ पश्चिमी यूरोप के विकसित देशों में भी युवाओं में गुस्सा है। कोरोना काल के बाद हालात और खराब हो गए हैं।