नीरा राडिया टेप लीक होने के बाद रतन टाटा ने 2011 में निजता के हनन को मुद्दा बनाकर याचिका दाखिल की थी। टाटा की ओर से दलील दी गई थी कि उनके फोन कॉल को बाहर लीक किया जा रहा है, जो आर्टिकल 21(2) के खिलाफ है। इस याचिका पर अंतिम सुनवाई 2014 में हुई थी।इस मामले में सुनवाई के दौरान टाटा की ओर से कॉर्पोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया की टेप में रिकॉर्ड बातचीत की रपट मुहैया कराने की मांग की गई थी। 2011 में एक सुनवाई के दौरान टाटा के वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से कहा था कि टेप पर रिकॉर्ड बातचीत की आयकर विभाग के महानिदेशक ने जो जांच रिपोर्ट बनाई है, उसे सौंपा जाए। ताकि वह इस मामले में टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं पर कानूनी कार्रवाई कर सकें।
कॉर्पोरेट दलाल नीरा राडिया की कंपनी टाटा समूह और मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के लिए जनसंपर्क का काम किया करती थी। 2010 में नीरा राडिया की विभिन्न उद्योगपतियों, राजनीतिज्ञों, अधिकारियों और पत्रकारों से फोन पर हुई बातचीत के करीब 800 टेप्स मीडिया में प्रकाशित हुए थे।