छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्गों के खत्म हो चुके आरक्षण को बहाल करने के लिए सरकार दो नये विधेयक ला रही है। इसके लिए विधानसभा का विशेष सत्र गुरुवार से शुरू हो गया। लेकिन संयुक्त विपक्ष को सरकार की ओर से तय आरक्षण का नया कोटा मंजूर नहीं है। भाजपा, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ और बहुजन समाज पार्टी के नेता संयुक्त रूप से एक संशोधन प्रस्ताव रखने की तैयारी में हैं। इसमें अनूसूचित जाति-SC के लिए 16% और सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10% आरक्षण की मांग किया जाना है।
विशेष सत्र के दूसरे दिन यानी शुक्रवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण) संशोधन विधेयक 2022 को पेश करने वाले हैं। इसके साथ ही शैक्षणिक संस्था (प्रवेश में आरक्षण) संशोधन विधेयक को भी पेश किया जाएगा। सरकार की योजना इन विधेयकों पर दिन भर की चर्चा के बाद पारित कराने की है। इस विधेयक में आदिवासी वर्ग-ST को 32%, अनुसूचित जाति-SC को 13% और अन्य पिछड़ा वर्ग-OBC को 27% आरक्षण का अनुपात तय हुआ है। सामान्य वर्ग के गरीबों को 4% आरक्षण देने का भी प्रस्ताव है। इसको मिलाकर छत्तीसगढ़ में 76% आरक्षण हो जाएगा।
19 सितम्बर तक प्रदेश में 68% आरक्षण था। इनमें से अनुसूचित जाति को 13%, अनुसूचित जनजाति को 32% और अन्य पिछड़ा वर्ग को 14% आरक्षण के साथ सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10% आरक्षण की व्यवस्था थी। 19 सितम्बर को आए बिलासपुर उच्च न्यायालय के फैसले से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण खत्म हो गया। उसके बाद सरकार ने नया विधेयक लाकर आरक्षण बहाल करने का फैसला किया है। संभावना जताई जा रही है, शुक्रवार को विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष आक्रामक ढंग से SC और EWS का कोटा बढ़ाने की मांग उठाएगा।