केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चल रही चर्चा के दूसरे दिन बुधवार को लोकसभा में दो घंटे छह मिनट लम्बा भाषण दिया। उनके भाषण का एक घंटा बीस मिनट तो मोदी सरकार के नौ साल के शासन बनाम पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के बही खाते का जोड़-बाकी बताने में बीता तो मणिपुर पर लगभग एक घंटा 14 मिनट की चर्चा में भी उन्होंने कांग्रेस की सरकारों पर उत्तर-पूर्व में हुई नस्लीय हिंसा की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे पहले कभी न तो प्रधानमंत्री कभी हिंसा प्रभावित इलाकों में गए और न ही सदन में जवाब दिया। ऐसे में पीएम से मणिपुर की घटनाओं पर जवाब की विपक्ष की मांग उचित नहीं है।शाह ने शाम पांच बजे बोलना शुरू किया और शाम सात बजकर 06 मिनट पर उनका भाषण खत्म हुआ। गृह मंत्री ने लगातार एक घंटा बीस मिनट तक मोदी सरकार की एक एक उपलब्धि को गिनाते हुए कांग्रेस सरकारों के कामकाज से तुलना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष को भले ही पीएम मोदी पर अविश्वास हो, लेकिन देश की जनता को मोदी पर पूरा भरोसा है। इसके बाद वे मणिपुर के मुद्दे पर आए। उन्होंने मणिपुर में 3 मई से शुरू हुई हिंसक घटनाओं को शर्मनाक बताते हुए कहा कि इससे भी ज्यादा शर्मनाक इन घटनाओं का राजनीतिकरण है। उन्होंने कहा कि मणिपुर में हुई घटनाएं परिस्थितिजन्य हैं। इन्हें राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंसा का कारण 29 अप्रैल को मणिपुर हाईकोर्ट के मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति घोषित किए जाने के फैसले के बाद उपजी असुरक्षा की भावना है।